हमारे मोहल्ले में एक बाबा आता था सबके घर नहीं पर गिने चुने घरों में वो भिक्षा लेता था।उनमें एक हमारा घर भी था।मेरी दादी मेरी मां कमला को बहुत गुस्सा करती थी कि क्यों देती हैं इस बूढ़े को रोज खाना बाकी लोग तो फिर भी बचा खुचा देते थे मां जैसे ही आवाज सुनती तवा चढ़ा ताजी रोटी सब्जी देती और वो मां को भर भर दुआएं देता।मां हमेशा दादी को कहती क्या पता मां बाबा की दुआओं से ही हमारी बरकत हो रही हो।बहु तू कुछ भी कह मै नहीं मानती।एक बार मां को नानी बीमार होने के कारण गांव जाना पड़ा मा परेशान थी कि बाबा को खाना कौन देगा।
दादी बोली जा बहु तेरे आने तक मै तेरी जिम्मेदारी संभाल लूंगी तेरी नाक नहीं कटने दूंगी।मां चली गई और दादी मां की जिम्मेदारी निभाती रही।बाबा अब घर के सामने ही बहुत बड़ा पेड़ था वहां पर आकर रहने लगे मां और आस पड़ोस की औरतों ने उनके रहने खाने की व्यवस्था कर दी और रात को स्कूल का आंगन का कमरा उनके सोने के लिए खोल दिया जाता ।समय गुजर रहा था मैं मोहन मेरी दो बहने उमा और रमा थी पिताजी रेलवे में थे उनकी पोस्टिंग बिलासपुर में थी और हम सब पढ़ाई के कारण भोपाल में किराए के घर में रहते थे।
हम बड़े हो रहे थे इसी बीच दादी चल बसी।बाबा की उमर हो चली थी पर उनका ध्यान पूरा हमारे घर पर होता । रमा दीदी का ये आखिरी कॉलेज का साल था उन्हें स्टेटिक्स पढ़ने के लिए ट्यूशन की जरूरत थी घर के सामने मीना काकी रहती थी उनकी बहन का बेटा राजन CA कर रहा था। मीना काकी बोली रमा बिटिया को यही भेज दिया कर राजन पढ़ा देगा।राजन होशियार था कमला ने उससे फीस पूछी वो बोला आंटी क्यों शर्मिंदा करती हो पर पिताजी की सख्त हिदायत थी कि फीस ले तभी पढ़ने भेजना 800 रुपए में बात पक्की हो गई।
रमा वहां जाने लगी राजन अच्छा पढ़।ता था एक घंटा उन्हें कोई परेशान नहीं करता था छत पर दोनों पढ़ते कब दोनो में लगाव हो गया पता ही नहीं चला दीदी की परीक्षा हुई उधर राजन का भी पेपर हो गया आखिरी दिन था उन दोनों के मिलने का राजन और दीदी एक दूसरे से मिल रोये और भावनाओं में बह गए ।दीदी बोली राजन अगर कुछ ऊंच नीच हो गई तो क्यों डरती हो मै हूं ना।
राजन के जाने मै एक हफ्ता था पेपर हो गया तो मां भी नहीं भेजती थी फिर भी दीदी राजन से मिलने का बहाना ढूंढती पर उन्हें एकांत नहीं मिल रहा था।अगले दिन सुबह नीचे मीना काकी की आवाज आई कमला मुझे दो दिन के लिए बच्चों संग मायके जाना है ये भी जा रहे है राजन का दो दिन खाना नाश्ता देख लोगी।मां बोली हां हा क्यों नहीं। रमा दिन में नीचे ही थी मां बोली राजन को खाना देना है मां मुझे ढूंढ रही थी।मोहन कहा है। रमा बोली वो बाहर गया है क्या हुआ अरे राजन को खाना देना था लाओ मैं दे आऊं तू उनके घर में कोई नहीं है मां मुझे दे दो मै दे कर सीमा की तरफ निकल जाऊंगी। रमा आई और राजन और वो एक दूसरे में समा गए ।
3 घंटे बाद रमा को होश आया वो बोली मै चलती हूं मां मुझे ढूंढ रही होगी।वो जल्दी बाहर निकली देखा पेड़ के नीचे बैठा बाबा उसे ही देख रहा है।दो तीन दिन बाद राजन कमला को घर की चाबी देने आया बोला आंटी मेरी नौकरी लग गई है मै जा रहा हूं आप मौसी को चाबी दे देना।राजन चला गया इधर रमा बड़ी परेशान उसे अगले महीने डेट नहीं हुई वो परेशान क्या करे उसका रिजल्ट भी आ गया मां भी उसको देख रही थी अनुभवी थी उसने देखा ये जो खाती पीती उलट देती ।
मां ने डॉट डपट की तो रमा ने सब बताया।मां ने सिर पीट लिया कमबखत तूने क्या किया ।क्या मुंह दिखाएंगे हम दुनिया में अगले दिन मीना काकी को मां ने घर बुलाया और कहा कि राजन का पता दो उसके मां बाप से बात करनी है क्या राजन और रमा के रिश्ते की क्या राजन की तो शादी तय है अगले महीने बीवी बैंक में है वो क्यों शादी करेगा रमा से। रमा यह सुन नीचे बैठ गई काकी उसका अंश है मेरे गर्भ में और वो यही कहता था मुझसे शादी करेगा ।बेटी मुझे तो कुछ नहीं पता तू उसे फोन लगा क्या कहता है वो ।
रमा ने उसे फोन किया 5 घंटी बाद उसने फोन उठाया मै बिजी हूँ कॉल क्यों किया। राजन तुम्हे कुछ बताना है क्या मैं मां बनने वाली हूं।किसके बच्चे की ।क्या किसके बच्चे की तुम्हारे ।हो ही नहीं सकता तुम पता नहीं कहा कहा मुंह काला करती होगी और इल्ज़ाम मुझ पर।नहीं राजन मैने तुम्हारे कहने पर ही यह कदम उठाया था मुझे मत ठुकराओ।मुझे दुबारा फोन मत करना वरना तुम्हे कही का नहीं छोड़ूंगा।मीना काकी बोली लाला कोई बात है तो मुझे बता ।
मौसी तुम कहा इन झूठों के चक्कर मे फंस गई।इस लड़की को कम पैसों में पढ़ाया अब ये मुझ जैसे अमीर पढ़े लिखे लड़के को फसाना चाह रही है कमला सिर पकड़ कर बैठ गई।मीना काकी बोली मै क्या करूं ये उमर ही ऐसी है वो साफ मना कर रहा है ये किसका बच्चा हो सकता हैं।मां मीना काकी के पैरों में गिर गई ये बात किसी को पता नहीं चले मै देखती हूं क्या करना है तभी दरवाजा बजा सामने बाबा खड़ा था बाबा आज खाना नहीं बना माफ़ कर दो।
बेटी मुझे तुझसे कुछ बात करनी है तेरे नमक का कर्ज चुकाना है।बेटी से गलती हुई ये माना और ये राजन का ही काम है सो फ़ीसद मैने दोनों को देखा है अब तू ये पता ले और बेटी के रिश्ते की बात कर लड़का वकील है दिल्ली हाईकोर्ट में सब अच्छा होगा।उसी दिन कमला रमा को ले बिलासपुर आ गई वहां डॉक्टर को दिखाया और दवाइयों से ही उसका गर्भपात हो गया 15 दिन बाद वो लौट आये। जो रिश्ता बाबा ने बताया था वहां मां और पापा गयें।
लड़के का नाम रोशन था घर में पिताजी ज्ञानदीप जो खुद भी वकील रह चुके थे और मां कनक थी ।कमला जी ने चिट्ठी दी ज्ञान जी बोले भाई साहब की चिट्ठी आपको कहा मिली उन्होंने कहा वो तो पिछले 20 – 22 साल से हमारे मोहल्ले में आ रहे हैं।आपका उनसे क्या सम्बन्ध है।सिर्फ इतना कि मैने उन्हें खाना खिलाया है और रहने को आसरा दिलवाया है।
बहन आपको पता है वो कौन है? वो मेरे बड़े भैया भूषण है जो खुद एक बड़े वकील थे पर एक हादसे में उनकी प्रिय पत्नी आनंदी और बेटी अनामिका का निधन हो गया वो पागल से हो गए और एक दिन रात को घर से चले गए हमने उन्हें कहा कहा नहीं ढूंढा।
बहन मुझे ले चलो उनके पास सब भोपाल आ गए।बाबा को गले लगा ज्ञान जी रोने लगे बोले भैया कहा चले गए थे।बाबा ने ज्ञान से कहा मैने चिट्ठी में एक काम लिखा था क्या हो जाएगा बिल्कुल हो जाएगा रोशन साथ आया है जी काका जो आप कहे लड़की अच्छे परिवार की है ये मेरी बहन है कमला जिसने मेरा ध्यान रखा इसी की बेटी है गुणी चरित्रवान तू शादी करेगा ना जी काका अगले दिन एक सादा समारोह में रमा की शादी हो गई और वो दिल्ली चली गई।ज्ञान ने भूषण से कहा भाई आप भी चलो मै आऊंगा कुछ काम रहता है वो पूरा कर।
उसी रात उन्होंने कमला से कहा तू ये मोहल्ला छोड़ कर बिलासपुर चली जा अपने पति के पास बेटे मोहन का दाखिला दिल्ली हो जाएगा और उमा को अपने पास ही रखना और तू चिंता मत कर अपनी बेटी का राज़ मेरे और तेरे सीने में दफन रहेगा सुन मीना को मैने समझा दिया है ये बात कभी बाहर नहीं आएगी क्योंकि उसकी बेटी का भी राज़ कही ना कही मेरे पास ही दफन है तभी वो कुछ नहीं बोलेगी। कमला और उमा अपने पिता के पास चले गए।मोहन को दिल्ली के कॉलेज में दाखिला मिल गया उधर राजन की नौकरी और रिश्ता दोनों ही छूट गए।उसने फिर मीना के घर का रुख किया तो मीना ने उसे धक्के दे कर निकाल दिया।
भूषण दिल्लीं अपने घर गए वहां कमला और रमा से वो मिले ।कमला बोली भाईजी आपने मेरी और मेरी बेटी की इज़्ज़त बचा ली सगे रिश्ते भी ये नहीं करते अरे पगली यही तो रिश्तों के रंग हैं अपने नहीं कभी कभी कोई दिल का रिश्ता हमे छू जाता है खुश रहो आबाद रहो सदा सुखी रहो।अपने भाई को याद रखना जब जरूरत होगी मै जरूर आऊंगा।भूषण वहां से चले गए पर फोन पर बात करते और सबका हाल चाल पूछते।कमला कई बार सोचती एक रोटी का रिश्ता कहा उसके और उसकी बेटी के जीवन में रंग भर गया।
स्वरचित कहानी
आपकी सखी
खुशी