वाह …आज क्या कटहल की सब्जी बनी है…
बहुत ही स्वादिष्ट बनी है…
डाइनिंग टेबल पर बैठे सभी लोगों ने कटहल की सब्जी की बहुत प्रशंसा की..!
आराध्या मन ही मन खुश हो रही थी कि सब्जी के साथ उसकी भी तारीफ होगी…क्योंकि सब्जी तो वो ही बनाई है…!
पर कुछ ही देर में सासू मां ने कहा…
हां – हां…. वो विश्वकर्मा जी के घर का कटहल है ही बहुत अच्छा …उसकी सब्जी बनती ही स्वादिष्ट है …!
सासू मां के इस जवाब से आराध्या थोड़ी मायूस हो गई……
…..खैर…
हफ्ते भर के बाद फिर से कटहल की सब्जी बनी….
आज डाइनिंग टेबल पर खाना खाते वक्त सभी ने कहा….
ये कैसी सब्जी बनी है एकदम से फीकी कोई स्वाद नहीं है
पर कटहल तो विश्वकर्मा जी के घर का ही है आराध्या ने तपाक से उत्तर दिया….
आराध्या के इस उत्तर से सासू मां का चेहरा देखने लायक था…!
(स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित रचना)
लघु कथा
संध्या त्रिपाठी