ऑफिस में घुसते ही जैसे ही मुस्कान अपनी चेयर पर बैठी ,तभी 55 वर्ष के मिस्टर विमल उसकी टेबल पर आयें ,बोले – हेलो मुस्कान !
मुस्कान – जी नमस्ते, कहिये सर ,कुछ काम हैँ ??
मिस्टर विमल -वो सुना हैँ तुम अपने पति से तलाक ले रही हो ! कोई परेशानी हैँ क्या ?? बच्चें होने के बाद अलग होना समझ नहीं आया !
मुस्कान – जी सर ,आपने सही सुना हैँ ! कुछ निजी कारण हैँ ,आपको नहीं बता सकती ! थैंक यू आपने पूँछा !
मिस्टर विमल – वो कोई बात नहीं ,पर तुम इतनी खूबसूरत ,जवान,समझदार महिला से कोई पति कैसे तलाक ले सकता हैँ भला ??
मुस्कान (गुस्से में ) – तलाक वो नहीं ,मैं ले रही हूँ सर !!
मिस्टर विमल – ओह ,यू आर वैरी बोल्ड ! ऐसे अकेले जीवन कैसे काटोगी ! ज़रूरत हो ,,तो मैं हूँ ! बेहीचक कह देना ! वैसे भी तुम तो मुझे जब से यहाँ आयी हूँ ,तब से पसंद हो ! तुम्हे पता ही हैँ मेरी पत्नी दो साल पहले ही गुजर गयी ! तब से काफी अकेलापन महसूस करता हूँ ! तुम चाहो तो आज मेरे घर ….
मुस्कान – सर ,आप ये क्या कह रहे हैं ,मैं कुछ समझी नहीं ! आप तो मेरे पिता समान हैँ ! अगर आप बेटी समझकर ये कह रहे हैँ तो अच्छी बात हैँ नहीं तो ….
मिस्टर विमल – ( गंदी हंसी के साथ ) – बेटी ,माय फूट ! मुस्कान का हाथ जबरदस्ती पकड़ते हुए – जानता हूँ ,तुम जैसी लड़कियों को अच्छे से ! आज एक के साथ ,कल दूसरे के साथ ! वो मैं थोड़ा उम्रदार हूँ ,इसलिये ऐसा बोल रही हैँ ! मालामाल कर दूँगा ! कुछ वक़्त मेरे साथ भी गुजार ले ! जानता हूँ कितनी चरित्रवान होती हैँ तलाकशुदा लड़कियां ! बता कितने लेगी ??
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मुस्कान मिस्टर विमल के चेहरे पर झंनाटेदार थप्पड़ लगाते हुए ! थप्पड़ की गूंज पूरे ऑफिस में सुनाई दी ! सब अपना काम छोड़ मुस्कान और मिस्टर विमल की तरफ देखने लगे !
मुस्कान – सर ,तलाकशुदा हूँ ,चरित्रहीन नहीं ! आप अपनी बेटी से ये सब बात क्यूँ नहीं कहते ! सुना हैँ ,वो भी तलाकशुदा हैँ !
मिस्टर विमल ,देख लूँगा तुझे ,,कहते हुए अपना गाल पकड़े ,बेइज्जती होती देख गुस्से में आग बबूला हो ,अपनी सीट पर आकर बैठ गए !
मुस्कान रोती हुई अपना बैग ले सीधा अपनी एक्टीवा उठा एक घर के बाहर जाकर रुकी ! उसने डोरबेल बजायी ! अंदर से एक दुबला पतला ढ़ांचे से शरीर का यहीं कोई 35 वर्ष का आदमी आया !
तुम यहाँ ,आओ अंदर आओ ! साहिल ( आदमी ) बोला !
मुस्कान – ये क्या हाल बना लिया हैँ तुमने ,कितने दुबले हो गए हो ! और ये आँखें कैसे सूज रही हैँ ! पीना नहीं छोड़ा ना ! नहीं सुधरोगे तुम !
साहिल – तुमसे पहले ही कहाँ था मुस्कान कि तुम्हारे और बच्चों के बिना नहीं रह पाऊंगा ! शराब को तो उस दिन से हाथ नहीं लगाया ,जबसे कोर्ट में सोनू (बेटा ) ने कहा था ,पापा अब गंदी चीज मत पीना !! एक छोटी सी गलती की इतनी बड़ी सजा मत दो ! पर तुम तो अपने उसूलों की पक्की हो …पर तुम्हारी आंखे क्यूँ लाल हैँ ,तुम तो कह रही थी मुझसे दूर होकर बहुत खुश रहोगी ! अपनी ज़िन्दगी खुलकर ज़ियोगी ??
मुस्कान – समझ गयी हूँ साहिल ,ये दुनिया बहुत बुरी हैँ ! एक अकेली औरत को बस सब हवश का शिकार बनाना चाहते हैँ ! ये शादी का नियम गलत नहीं बनाया हैँ ! माँ बाप बेटी के साथ सारी उम्र नहीं रह सकते इसलिये उसे एक सुरक्षाकवच के रुप में पति रूपी ढाल दी जाती हैँ ! जो उसे दुनिया की बुरी नजर से बचायें ! मुझे माफ कर दो साहिल ! चलो अपने परिवार के पास ! फिर साथ मिलकर रहेंगे ! अगर कभी अलग होने को बोलू तो एक थप्पड़ लगा देना ,पर मुझे छोड़कर मत जाना ! मुस्कान सिस्कियां भरती रही !
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साहिल खुशी से झूम उठा ! मुस्कान को गोद में उठा लिया ! चलो चले अपने आशियाने में ! दोनों एक दूसरे के गले लग गए !
इस तरह एक परिवार आपसी समझदारी से अलग होने से बच गया ! इसलिये
अपने रिश्ते को खत्म करने से पहले एक कोशिश तो कीजिए
जब कोई रास्ता ना बचे तभी अलग होने का फैसला लीजिए !!
स्वरचित
मौलिक अप्रकाशित
मीनाक्षी सिंह
आगरा