सोने के कंगन – मधु वशिष्ठ
आज मालती जी की 50वीं सालगिरह थी। भारी भरकम साड़ी और गहने पहनी हुई इस उम्र में भी वह दुल्हन सी प्रतीत हो रही थीं। होटल में जाने के लिए सब बच्चे बाहर गाड़ी में दादू के साथ बैठे हुए दादी के आने की इंतजार कर रहे थे। तभी अचानक मालती जी को कुछ याद … Read more