देहाती लोग कभी नहीं सुधरेंगे !! – स्वाती जैंन

सुनीता बोली सच गाँव के लोगो को शहर के कितने भी तौर – तरीके सीखा लो मगर वे गाँव वाली हरकतें ही करेंगे !! यह सुनकर रुक्मणि जी का दिल एक बार फिर टूट गया , कितनी उम्मीदे लेकर गाँव से आए थे रमाकांत जी और रूक्मणि जी मगर सुनीता दोनों को कुछ भी सुनाने … Read more

बहु – खुशी

जानकीनाथ चार भाई और तीन बहने थी। जानकी नाथ जी का बर्तनों का कारोबार था। बाजार में उनकी पांच दुकान थी चारों भाई मिलकर एक ही घर में रहते ।नंदा और मंदा दोनों की शादी हो चुकी थी।विजय नाथ ,राजीवनाथ और श्यामनाथ चारों मिलकर दुकान संभालते थे।पत्नियों में भी एका था जानकी नाथ की धर्मपत्नी … Read more

क्या? सारी जिम्मेदारी बहूओं की ही है – मीनाक्षी गुप्ता

दिनेश जी और मालती देवी दिल्ली के एक सामान्य उच्च-मध्यम वर्गीय परिवार थे। उनके दो बेटे—विक्रांत, रोहित—और एक बेटी अनीता थी। मालती देवी की उम्र हो चली थी और उनका स्वास्थ्य अब उतना साथ नहीं देता था। बड़े बेटे विक्रांत की शादी कामिनी से हुई। कामिनी बहुत ही सरल और अच्छे स्वभाव की थी। शादी … Read more

नेग का लालच – रश्मि प्रकाश

“ ये क्या कह रही हो दीदी आप…. सच में बड़ी भाभी ने ऐसा कहा…?” आश्चर्य से बड़ी बड़ी आँखें कर राशि ने नीति से पूछा  “ तो क्या मैं झूठ बोल रही हूँ….. जब उन्होंने कहा है तभी तो आपसे कह रही हूँ….हाँ अब विश्वास करना ना करना आपके उपर है।” कह नीति वहाँ … Read more

मुझे बर्दाश्त नहीं है अब अनु का निरादर – मंजू ओमर

सुमित्रा जी एक लोटा पानी लेकर आई और गणेश लक्ष्मी जी की पूजा में बैठे बेटे दीपेश के सामने जलते हुए दीपक में पानी डाल दिया। बेटा दीपेश चौक गया ये क्या किया मां पगला गई हो क्या ,इन जलते दीपक पर पानी क्यों डाल दिया । तुमने गणेश लक्ष्मी जी का अपमान किया , … Read more

बहू भी मनुष्य है – लतिका पल्लवी

दामोदर जी नें घर मे घुसते ही कहा“जल्दी से खाना लगा दो,त्यौहार का दिन है इसलिए आज दुकान मे भीड़ है।कैसे करके खाना खाने के लिए आया हूँ,मै ज्यादा देर नहीं रुक सकता।”खाना अभी नहीं बना है,अर्चना जी ने कहा।तीन बज गया और अभी तक दोपहर का खाना नहीं बना! यह घर मे हो क्या … Read more

परिवर्तन – खुशी

नरेन्द्र जी का एक बहुत बड़ा पब्लिकेशन हाउस था।जहां नए नए लेखकों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता था और बहुत सारे कर्मचारी उनके यहां काम करते थे।सभी कुछ बहुत अच्छा चल रहा था।घर परिवार में दो बच्चे पीयूष और पायल पत्नी सावित्री और माता पिता दमयंती और लक्ष्मण ।सभी खुश रहते थे और … Read more

सीनियर लगते नहीं

   ” ये क्या आप मुझे हर वक्त सीनियर-सीनियर कहते रहते हैं..मेरा नाम लेते हुए क्या आपका गला दुखता है।” नीरू अपने पति महेश जी पर चिल्लाई।जवाब में वो मुस्कुराते हुए बोले,” अब बच्चे तुम्हारे सयाने हो गये हैं और तुम्हारे बालों पर भी चाँदी चमकने लगी है तो हो गई ना तुम सीनियर..इसमें चिढ़ने वाली … Read more

बुढ़ापा

महिमा जी अपनी पोती की शादी में सम्मिलित होने कानपुर गईं थीं।वे सोफे पर बैठीं थीं। चाय का दौर चल रहा था और भी रिश्ते दार महिलाएं बैठीं थीं आपस में चुहलबाज़ी, गपशप चल रही थी।तभी रुपाली उनके भतीजे की पत्नी आती दिखाई दी वह कमर झुका कर चल रही थी। एक तो रुपाली का … Read more

क्या सारी जिम्मेदारी बहुओं की ही होती है?

सीता देवी के घर में आज फिर वही बहस छिड़ी हुई थी। आँगन में खड़ी तुलसी के पास बैठी, वो तेज़ स्वर में बोलीं—“देखो, अब घर की जिम्मेदारी तो बहू की ही होती है, हमने भी पूरी उम्र घर संभाला है।” उनकी बड़ी बहू अर्चना रसोई से निकलकर बोली—“माँजी ! मैं भी तो सब करती … Read more

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