जंगल में रोटी – देवेंद्र कुमार Moral Stories in Hindi

हरदीप सेठ बेटे प्रताप के साथ किसी काम से अपने पुश्तैनी गाँव जा रहे थे। दोनों घोड़ों पर सवार थे। हरदीप काफी पहले शहर में आकर व्यापार करने लगे थे। वहीं बड़ा मकान बनवा लिया था। पर बीच में जब भी समय मिलता गाँव जा पहुँचते। पुराने लोगों से मिलने और अपनी पुश्तैनी हवेली में … Read more

पार्टी हो जाए – देवेंद्र कुमार Moral Stories in Hindi

पुष्पा के घर किटी पार्टी चल रही थी। पुष्पा की सारी सखियाँ अपने परिवार के साथ आई थीं। डिनर हो चुका था, पर पार्टी ख़त्म होने पर नहीं आ रही थी। अब बच्चे बोर हो रहे थे। उन्होंने आपस में खुसफुस की, फिर सबको सुना कर कहा, “हम आइस क्रीम खाने जा रहे हैं।” फिर … Read more

घंटी की आवाज – देवेंद्र कुमार Moral Stories in Hindi

अनुज और दयाल स्कूल से घर आ रहे थे। घर तक शार्ट कट के लिए मैदान पार करते समय एकाएक दयाल लड़खड़ा गया। अगर अनुज ने हाथ न पकड़ा होता तो दयाल मुँह के बल गिर जाता। संभलकर वे जमीन की तरफ देखने लगे– जमीन पर एक डोरी पड़ी है। उसके दो छोरों पर छोटी-छोटी … Read more

वीरजी नाराज़ है – देवेंद्र कुमार Moral Stories in Hindi

एक था हाथी। जंगल में लकड़ियाँ ढोने का काम करता था। उसकी देखभाल करता था भीमा महावत। भीमा हाथी को प्यार से वीरजी कहता, वैसे वीरजी शांत स्वभाव का था, पर कभी-कभी किसी बात पर क्रोध आ जाता तो जोर से चिंघाड़ उठता। वीरजी की चिंघाड़ सुनकर जंगल में हलचल मच जाती। परिंदे डरकर पंख … Read more

आओ पार चलें – देवेंद्र कुमार Moral Stories in Hindi

तेज बरसात हो रही थी। भीखू मल्लाह अपनी नौका पर छाजन के नीचे सिमटकर बैठा था। छाजन चारों ओर से खुला था। बूँदों की बौछार भीखू को भिगो रही थी। लेकिन वह क्या करता और कोई उपाय भी तो नहीं था। भीखू का घर नदी के पार था। सोच रहा था, “आज का दिन तो … Read more

गुरु दक्षिणा – देवेंद्र कुमार Moral Stories in Hindi

ज्ञानदास विद्वान था, लेकिन स्वभाव का गुस्सैल। किसी से नहीं पटती थी। अपने स्वभाव के कारण कई जगह से नौकरी छोड़ चुका था। अपने पर बहुत काबू करने का प्रयास करता, लेकिन फिर भी क्रोध हावी हो ही जाता। घर में पत्नी से लड़ता रहता। नियमित नौकरी न होने से घर में तंगी रहती थी। … Read more

पानी नहीं चाहिए – देवेंद्र कुमार Moral Stories in Hindi

गाँव में मीठे पानी के अनेक कुएँ हैं पर गाँव से कुछ दूर एक पुराना कुआँ है सूखा हुआ। लोग सदा से कुएँ को वैसा ही देखते आ रहे हैं। कुएं के पास ही एक घना पेड़ है। उस रास्ते से गुजरने वाले पथिक पेड़ की घनी छांह की सराहना करते हुए यह कहना नहीं … Read more

अकेला ही काफी हूं – नेकराम Moral Stories in Hindi

हमारी श्रीमती रोज की तरह फिर मुझसे आज बोली,, हमारे बगल वाली पड़ोसन आज फिर रो रही थी दो सप्ताह से उसकी बेटी सितारा घर नहीं लौटी किसी लड़के ने प्यार के जाल में फंसा कर उसे नकली शादी कर ली और न जाने उसे कहां ले गया सितारा का फोन भी स्विच ऑफ जा … Read more

सोच से लड़ाई – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

“ मनीष बीस साल होने जा रहे है हमारी शादी को…ज़रूरी है माँ को गड़े मुर्दे उखाड़ना….पहली बार में ही मैं समझ गई थी कि बड़ी भाभी से माँ की बहुत बनती है…आपके पिताजी के देहान्त के बाद बड़े भैया भाभी ने पूरे घर को बहुत अच्छे से सँभाल लिया…अपने से छोटे दोनों भाई बहन … Read more

नेकराम की नई गुल्लक – नेकराम Moral Stories in Hindi

मेरा मुरझाया हुआ चेहरा देखकर हमारी श्रीमती बोली तुम मुंह लटकाए क्यों बैठे हो क्या हुआ,, छत से जरा से कपड़े लाने में थक गए हो क्या ,, मैंने मोबाइल दिखाते हुए कहा,, मोबाइल पानी के टब में गिरकर गीला हो गया शाम को ड्यूटी भी जाना है मोबाइल की जरूरत पड़ती है सातवीं कक्षा … Read more

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