मुझे भी जीना है केवल सांसें नहीं लेनी हैं – डॉ बीना कुण्डलिया

रंजना ओ रंजना रंजना कहां हो । पति बृजेश ने जैसे ही आवाज लगाई, पति की चिल्लाती हुई आवाज सुनकर रंजना जो रसोईघर में नाश्ते, उनके ऑफिस के लिए लंच की तैयारी कर रही दौड़ती हुई आई बोली क्या हुआ ? आप इतने गुस्से में क्यों चिल्ला रहे हैं ? पति बृजेश तो जैसे नाक … Read more

क्या पिता को सुख दुख की अनुभूति नहीं होती – शिव कुमारी शुक्ला

आज दशहरा था और सुखविंदर अपने ट्रक का माल उतरवा रहा था एक अंजान शहर में।वह अंतराज्यीय परमिट से चलने वाले लम्बी दूरी के ट्रक का ड्राइवर था। खाना खा वह तन्हा लेटा था तो अपने घर पत्नी, बच्चों की याद आ गई। आज त्योहार के दिन वह अकेला इस अनजान शहर में पड़ा है … Read more

सोने का कंगन – परमा दत्त झा

आज दीपावली के अवसर पर रिया को सास ने नये सोने के कंगन दिये थे।वह अकचका गयी और सास को देखती रह गई। मांजी आप और यह-वह बड़ी मुश्किल से बोली। बहू तेरे श्वसुर कहा करते थे देखना ममता मैं अपनी बहू को सोने का कंगन दूंगा ,मगर वह तो रहे नहीं।सो आज उनकी मृत्यु … Read more

देहाती लोग कभी नहीं सुधरेंगे !! – स्वाती जैंन

सुनीता बोली सच गाँव के लोगो को शहर के कितने भी तौर – तरीके सीखा लो मगर वे गाँव वाली हरकतें ही करेंगे !! यह सुनकर रुक्मणि जी का दिल एक बार फिर टूट गया , कितनी उम्मीदे लेकर गाँव से आए थे रमाकांत जी और रूक्मणि जी मगर सुनीता दोनों को कुछ भी सुनाने … Read more

बहु – खुशी

जानकीनाथ चार भाई और तीन बहने थी। जानकी नाथ जी का बर्तनों का कारोबार था। बाजार में उनकी पांच दुकान थी चारों भाई मिलकर एक ही घर में रहते ।नंदा और मंदा दोनों की शादी हो चुकी थी।विजय नाथ ,राजीवनाथ और श्यामनाथ चारों मिलकर दुकान संभालते थे।पत्नियों में भी एका था जानकी नाथ की धर्मपत्नी … Read more

क्या? सारी जिम्मेदारी बहूओं की ही है – मीनाक्षी गुप्ता

दिनेश जी और मालती देवी दिल्ली के एक सामान्य उच्च-मध्यम वर्गीय परिवार थे। उनके दो बेटे—विक्रांत, रोहित—और एक बेटी अनीता थी। मालती देवी की उम्र हो चली थी और उनका स्वास्थ्य अब उतना साथ नहीं देता था। बड़े बेटे विक्रांत की शादी कामिनी से हुई। कामिनी बहुत ही सरल और अच्छे स्वभाव की थी। शादी … Read more

नेग का लालच – रश्मि प्रकाश

“ ये क्या कह रही हो दीदी आप…. सच में बड़ी भाभी ने ऐसा कहा…?” आश्चर्य से बड़ी बड़ी आँखें कर राशि ने नीति से पूछा  “ तो क्या मैं झूठ बोल रही हूँ….. जब उन्होंने कहा है तभी तो आपसे कह रही हूँ….हाँ अब विश्वास करना ना करना आपके उपर है।” कह नीति वहाँ … Read more

मुझे बर्दाश्त नहीं है अब अनु का निरादर – मंजू ओमर

सुमित्रा जी एक लोटा पानी लेकर आई और गणेश लक्ष्मी जी की पूजा में बैठे बेटे दीपेश के सामने जलते हुए दीपक में पानी डाल दिया। बेटा दीपेश चौक गया ये क्या किया मां पगला गई हो क्या ,इन जलते दीपक पर पानी क्यों डाल दिया । तुमने गणेश लक्ष्मी जी का अपमान किया , … Read more

बहू भी मनुष्य है – लतिका पल्लवी

दामोदर जी नें घर मे घुसते ही कहा“जल्दी से खाना लगा दो,त्यौहार का दिन है इसलिए आज दुकान मे भीड़ है।कैसे करके खाना खाने के लिए आया हूँ,मै ज्यादा देर नहीं रुक सकता।”खाना अभी नहीं बना है,अर्चना जी ने कहा।तीन बज गया और अभी तक दोपहर का खाना नहीं बना! यह घर मे हो क्या … Read more

परिवर्तन – खुशी

नरेन्द्र जी का एक बहुत बड़ा पब्लिकेशन हाउस था।जहां नए नए लेखकों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता था और बहुत सारे कर्मचारी उनके यहां काम करते थे।सभी कुछ बहुत अच्छा चल रहा था।घर परिवार में दो बच्चे पीयूष और पायल पत्नी सावित्री और माता पिता दमयंती और लक्ष्मण ।सभी खुश रहते थे और … Read more

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