कड़वाहट – वीणा सिंह : Moral Stories in Hindi

आज न जाने क्यों मन विगत जिंदगी के पन्ने बार बार पलट रहा है… मैं संगीता पचासवें वर्ष में प्रवेश कर चुकी हूं… बेटी दामाद बेटा बहु सब अपनी जिंदगी में मस्त और व्यस्त हैं… और मै गुलमोहर की तरह हूं शायद इसी लिए मुझे गुलमोहर और पलाश बहुत पसंद हैं… मेरी ओर रजत की … Read more

रोते रोते बस अपनी किस्मत को कोसती जा रही थी । – रेखा सक्सैना : Moral Stories in Hindi

सुरेश अपनी पत्नी और दो बेटों के साथ शहर से दूर गांव में रहता  था । उसकी। आर्थिक  हालात कुछ अच्छी नहीं थी। रोज मजदूरी करने शहर जाता और उसे जो कुछ धन प्राप्त होता है उससे उसकी जीविका चल रही थी। परंतु वह अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर इस गरीबी के दलदल से … Read more

कड़वाहट – स्वाती जितेश राठी : Moral Stories in Hindi

सुधा  कितने वर्षों बाद आज गांव आई थी। बड़े पापा का पचहत्तरवां जन्मदिन  जो था! आखिर बड़े पापा ने ही सारे परिवार को एक सूत्र में बांध रखा था। पूरा परिवार इक्ट्ठा हुआ था। पूरे बयालीस लोगों का परिवार! हर तरफ हंसी ठठे की आवाज़, छोटे छोटे बच्चों को खेलता देखकर सुधा को अपना बचपन … Read more

जैसी करनी वैसी भरनी – नेकराम : Moral Stories in Hindi

दुल्हन बनकर जब मैं पहली बार अपने ससुराल आई थी तब अपनी पढ़ाई लिखाई और अपनी सुंदरता पर मुझे बड़ा घमंड था ससुराल में काम करने पर मुझे शर्म महसूस होती थी सारा दिन टीवी से चिपकी रहती थी सासू मां ही घर का सारा काम करती थी — पति तो मेरा मेरी उंगलियों में … Read more

जान की कीमत – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

बच्चों को स्कूल भेज कर राशि आराम से चाय पीने का सोच रही थी…. सुबह जल्दी उठने से बच्चों का टिफिन भी  तैयार हो गया था इसलिए इत्मिनान से चाय का लुत्फ़ उठा सकती थी। राशि अपने और अपने पति निकुंज के लिए चाय बना कर अभी कुछ घूँट ली ही थी कि फोन की … Read more

मेरे भाई का दामन भरा रहे – कमलेश आहूजा : Moral Stories in Hindi

नेहा अपने छोटे भाई रोहित से बहुत प्यार करती थी। रोहित भी अपनी बहन पर जान लुटाता था। नेहा को जरा भी तकलीफ होती तो वो सारा घर सिर पे उठा लेता था।रोहित अपने स्कूल का मेधावी क्षात्र था। घरवालों और सभी स्कूल के शिक्षकों को उससे बहुत उम्मीदें थीं। रोहित भी बहुत मेहनत करता … Read more

मेरी किस्मत में तो बस रोना ही लिखा है – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

अंकिता ने मेंहदी लगाने वाली के सामने जैसे ही अपना हाथ आगे बढाया अंकिता की बुआ सांस जोर से चिल्ला पड़ी अरे , अंकिता तुम कैसे मेंहदी लगवा सकती हो ये तो सुहागिनें लगाती है न और तुम ,,,,,,,,,।अरे भाभी तुम्हारी बहू को जरा भी अकल नहीं है कि मेंहदी तो सुहागिनें लगाती है ये … Read more

क़ीमत – महजबीं : Moral Stories in Hindi

आज पापा ऑफिस से लौटे तो बहुत खुश थे वह जल्दी से अपने कपड़े बदल कर मम्मी से बोले ,”अरे सुनती हो इधर आओ, मेरे पास बैठो।” मम्मी बोली, “क्या बात है ?आज बड़े खुश नजर आ रहे हो ।कोई खास बात है क्या ?” ‘बिलकुल “,पापा बोले ,अरे आज ऑफिस में अहमद आया था … Read more

ईश्वर की मदद – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

पून्नो  सूखी  लकड़ियाँ चुनते-चुनते जंगल में कितनी दूर निकल आई , उसे इस बात का अहसास तब हुआ जब पतली सी पगडंडी किसी दूसरी दिशा में मुड़ गई । चारों तरफ़ सन्नाटा, ऐसा लगा कि सूरज की किरणों की प्रचंडता से घबराकर जीव-जंतु तो क्या , पेड़-पौधों की परछाई भी छिप गई है ।  एक … Read more

दुर्दशा – डॉक्टर संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

अचानक जलाई गई लाइट से,रामस्वरूप जी की आंखें चौंधिया उठीं,नजर उठा के देखा उन्होंने,पड़ोस वाली बिट्टी ने आकर लाइट जला दी थी उनके कमरे की। “कब तक यूं ही अंधेरों में बैठकर इंतजार करोगे दादू,आपके बच्चे नहीं आयेंगे अब?” बिट्टी ने कहा तो राम स्वरूप बौखला गए,”हमेशा बुरा ही बोलेगी,अच्छा नहीं बोल सकती कभी?” “कई … Read more

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