रिश्तों की जंजीर – मंजू ओमर
रिया के घर आज एक अलग ही रौनक थी। सुबह से ही राधा जी बार-बार रसोई में जाकर चाय के कप सजातीं, कभी पर्दे ठीक करतीं, कभी रिया की साड़ी पर नजर डालकर कहतीं—“बेटा, पल्लू ठीक कर ले… बस थोड़ा-सा।” महेश जी भी आज असामान्य रूप से शांत थे, मगर उनके चेहरे पर जो उम्मीद … Read more