कलह से बचें ,प्यार फैलाएं – कमलेश आहूजा

दीपावली का पर्व था, जहां सारा जग खुशियां मना रहा था वहीं रोहन बेचारा उदास सा बैठा अपने कमरे में टीवी देख रहा।उसने सोचा था,शादी के बाद की इस पहली दिवाली को वो नेहा संग धूमधाम से मनाएगा पर रमा ने जैसे उसकी खुशियों पर पानी फेर दिया।बेटे की खुशियों को नजरंदाज करते हुए रमा … Read more

मैंने अपना फर्ज  निभाया। – मधुलता पारे

         राशि का गजानन  बाबू से कोई खास  परिचय  नहीं था कभी आमने सामने की उसकी उनसे भेंट भी नहीं हुई  थी केवल एक बार उन्हें दूर से देखा भर था घर के धुले पैजामें कुरते में  जिसकी सफेदी में हल्के पीलेपन की झलक दिखाई  दे रही थी एक शख्स  दूर अकेला खड़ा था राशि की … Read more

मैंने अपना फर्ज निभाया है – विधि जैन

सुशीला लगभग 28 वर्ष की हो चुकी थी उसके लिए रिश्ते तो बहुत आ रहे थे लेकिन कहीं भी उसकी शादी सेट नहीं हो पा रही थी घर में बहुत टेंशन था मां बाप के पास ज्यादा पैसे नहीं थे मां सिलाई कढ़ाई करती थी और पिताजी छोटा-मोटा काम कर लेते थे लड़के वाले जो … Read more

समस्या से बचना समझदारी नहीं है – लतिका पल्लवी

“जहाँ सुमति तहाँ सम्पति नाना, जहाँ कुमती तहाँ विपत्ति निधाना” तुलसीदास की यह वाणी मृदुला के जीवन पर एकदम सही बैठती है। मृदुला की शादी के मुश्किल से तीन माह भी नहीं हुए थे पर उसनें अपने व्यवहार से पुरे घर को परेशान कर रखा था। तंग आकर उसके पति नें एक दिन उससे कहा … Read more

कलह – मीनाक्षी गुप्ता

शहर की एक अच्छी कॉलोनी में वर्मा जी का फ्लैट था। घर में थे श्रीमान अशोक वर्मा, उनकी पत्नी निर्मला जी, बेटा अमित, और सबसे प्यारी शांता जी (वर्मा जी की माँ और अमित की दादी)। अमित की पत्नी, अमिता, एक मल्टीनेशनल कंपनी में मार्केटिंग हेड थी। निर्मला जी एक समर्पित गृहिणी थीं। उन्होंने अपनी … Read more

रिश्तों का बंटवारा नहीं – शुभ्रा बैनर्जी 

रवि ने बड़े भाई की जिम्मेदारी बहुत अच्छे से निभाई थी।पापा नौकरी से रिटायर हो चुके थे।दो बहनें और एक छोटा भाई था। रवि की नौकरी लग गई थी, पर छोटे भाई (शशि)को नौकरी में कोई रुचि नहीं थी।एक जमीन खरीदकर उसी में मछली पालन का व्यवसाय शुरू कर दिया था उसने। रवि की शादी … Read more

कलह – मंजू ओमर 

महेश बेचैनी से आपरेशन थियेटर के बाहर चहलकदमी कर रहा था । थोड़ी देर में डाक्टर बाहर आए तो महेश लपककर डाक्टर के पास जा पहुंचा, डाक्टर साहब मेरी पत्नी कैसी है । हां मैंने उसका पेट क्लीन कर दिया है , लेकिन अभी भी उनके जिस्म में ज़हर का असर है और वो बेहोश … Read more

घाव हरा करना – सुदर्शन सचदेवा

कालेज का वार्षिकोत्सव था। पूरा कैंपस रोशनी और रंगों में डूबा हुआ था। हर ओर हँसी, संगीत और दोस्तों की बातें। आयुषी भी मंच की तैयारियों में व्यस्त थी। तीन साल बाद वह फिर से कल्चरल टीम की लीडर बनी थी। पर आज कुछ अलग था — उसका दिल अजीब-सा भारी लग रहा था। उसी … Read more

भागी भगोड़ी बेटी – डॉ बीना कुण्डलिया 

बारह बर्ष पहले घर छोड़कर चली गई नमिता, आज घर लौट कर आ रही है । जिन्दगी की भागदौड़ से थककर सुकून की तलाश करती उसकी वापसी हुई। उसने देखा कितना कुछ बदल गया। उसका वो छोटा सा कस्बा कच्ची पगडंडियों की जगह सड़क बन गई। जगह जगह बस स्टॉप बन गये । पहले जब … Read more

कलह – खुशी

रजनी शादी हो कर एक भरे पूरे घर में हुईं थी।जहां सास सरस्वती और ससुर घनश्याम पति राघव देवर धीरेन और बहन राधा ऐसा परिवार था।ससुर की परचून की दुकान थी।राघव सेल्स मेन था जो एक साबुन की कंपनी में काम करता था।धीरेन एक फर्म में नौकरी करता था। राधा बारहवीं कक्षा में पढ़ती थी।सास … Read more

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