रिश्तों की नई शुरुआत – निभा राजीव
सुबह के नौ बज चुके थे, पर मीरा अभी तक अपने कमरे से बाहर नहीं निकली थी। खिड़की के परदे आधे खिंचे हुए थे, कमरे में हल्की-सी धुंधलाहट थी। बिस्तर पर बैठी वह खाली नज़र से दीवार को देख रही थी। पिछले पंद्रह दिनों से वह मायके में ही थी और उसके चेहरे से जैसे … Read more