“इश्क ” एक गुनाह (भाग-6) – रचना कंडवाल : Moral stories in hindi

प्लान के मुताबिक अदिति और राजवीर “द रोस्ट रिट्रीट कैफे” में शाम चार बजे मिलते हैं। जहां वो अदिति को अपना इंट्रोडक्शन देना चाहता है पर अदिति उसे रोक कर खुद उसका इंट्रोडक्शन उसके सामने रखती है वो ये भी कहती है कि वह अपनी गर्लफ्रेंड लीजा जोसेफ के साथ लिव-इन में रहता है अब … Read more

“इश्क ” एक गुनाह (भाग-5) – रचना कंडवाल : Moral stories in hindi

अदिति को जब पता चलता है कि राजवीर ने शादी के लिए हां कर दी है तो उसे बेहद गुस्सा आता है। वो राजवीर को फोन करके कहती है कि इस शादी से मना कर‌ दे परंतु राजवीर कहता है कि अगर वो उससे मिलने “द रोस्ट रिट्रीट कैफे” आएगी तो वो शादी से मना … Read more

“इश्क ” एक गुनाह (भाग-4) – रचना कंडवाल : Moral stories in hindi

वो हवेली पहुंचा तो उसका मूड ऑफ हो चुका था। आज तक ऐसा उसके साथ कभी नहीं हुआ था। वो सीधे अपने रूम में चला गया। फूलचंद मानवेंद्र सिंह के पास गया। फूलचंद सब कुछ ठीक रहा?? बड़े सरकार !  हुक्म सा पूरे रास्ते कुछ ना बोले। तुमने कुछ नहीं पूछा। नहीं सरकार मेरी इतनी … Read more

“इश्क ” एक गुनाह (भाग-3) – रचना कंडवाल : Moral stories in hindi

उसने लड़की के बारे में कुछ भी पूछने की जरूरत नहीं समझी। लालची गंवार लोग राणा खानदान से रिश्ता जोड़ कर सोसायटी में अपनी हैसियत ऊंची करने का सपना देख रहे हैं। दोपहर साढ़े बारह बजे वो लोग पहुंचे तो कुलवीर चौधरी ने उनका वेलकम किया। लंबे चौड़े शानदार व्यक्तित्व के शख्स रौबदार चेहरा तराशी … Read more

“इश्क ” एक गुनाह (भाग-2) – रचना कंडवाल : Moral stories in hindi

मानवेंद्र सिंह उसका जवाब जानते थे उन्होंने थके हुए स्वर में कहा। ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी उन्होंने गहरी सांस ली। तुम कल ही वापस लौट जाओ। दोबारा यहां कभी मत आना। उन्होंने मुंह फेर लिया। बाबा प्लीज ऐसा मत कीजिए उसने आगे बढ़ कर उन्हें गले से लगा लिया। वीर! शायद तुम नहीं जानते … Read more

“इश्क ” एक गुनाह (भाग-1) – रचना कंडवाल : Moral stories in hindi

सुबह का वक्त हवेलियों के शहर बीकानेर में विशाल पुश्तैनी हवेली की छत पर खड़ा एक नौजवान उगते हुए सूरज को देख रहा है। तभी पीछे से आवाज आई   “हुक्म सा” उसने बिना पीछे मुड़े  कोल्ड वायस में कहा, कहो “फूलचंद” बड़े सरकार आपको बुला रहे हैं।  तुम चलो मैं आता हूं वो पीछे … Read more

“सासूजी मैंने मान लिया कि बहू कभी बेटी नहीं बन सकती” – सिनी पांडे : Moral Stories in Hindi

मुस्कान अपने माता पिता की सबसे छोटी बेटी थी।देखने मे सुंदर,गोरा रंग,शर्मीला स्वभाव,संस्कारी आचरण-उसके व्यक्तित्व को आकर्षक बनाते थे। मुसकान का संयुक्त परिवार था।उसके पिता का बड़ा व्यवसाय था तो उसके लालन पालन में कोई कमी नही रखी गयी थी। घर में सबकी लाडली थी वो। अपने दादी बाबा की चहेती,माँ की जान,चाचा चाची की … Read more

बेटी की बेटी बनाम बेटे की बेटी – पूनम बगाई : Moral Stories in Hindi

“नीना शाम को 4 से 6  सप्तमी वाले दिन मेरे यहाँ चौकी है। जरूर आना।” सीमा जी ने नीना को मुस्कुरा कर कहा।  “क्या बात सप्तमी पर तुम करवा रही हो अब की बार”। नीना जी, जो कि एक नंबर की गपोड़ी और सीमा जी की अच्छी दोस्त भी थी ने सीमा जी को रोकते … Read more

फ़ोन की बजती घंटी…. – पूनम बगाई : Moral Stories in Hindi

मोबाइल साइलेंट पर था पर फिर भी उस पर होने वाली घर्र घर्र सुषमा जी के कानो में साफ़ सुनाई दे रही थी जिसे वे चाय के घूँट के बीच अनदेखा करने की भरपूर कोशिश कर रही थी। वे जानती थी ये फ़ोन समीर यानी कि उनके बेटे का है।  मोबाइल की घर्र घर्र की … Read more

मासी नहीं मम्मा… – रश्मि झा मिश्रा : Moral Stories in Hindi

…”कुहू… ना मेरी गुड़िया… वहां मत जा…!” ” मम्मा जाना…!” ” नहीं बेटा… अभी नहीं…!” ” नहीं… मम्मा जाना…!”  कुहू एक ही रट लगाए बैठी थी…  पर मम्मा जाने के लिए… मां को होना भी तो चाहिए…  सुमन ने खींचकर उसे सीने से लगा लिया… ” मैं हूं ना बेटा… मासी… मैं ही तेरी मम्मा … Read more

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