सब समय समय की बात है – मंजू ओमर 

समय समय की बात  है सरोज बहन , हमारे समय में तो ऐसा नहीं होता था। हमारे समय में तो बेटा बाप के सामने ऊंची आवाज में बात नहीं करता था।और पिता ने कोई बात कह दी तो उसे काट तो सकता नहीं था। इतनी हिम्मत ही नहीं होती थी बच्चों की। ऐसे संस्कार दिए … Read more

 कैसे कैसे इज्जतदार – गीता वाधवानी

आज घनश्याम दास और उनकी पत्नी आशा देवी बहुत खुश थे क्योंकि उनकी बेटी सुरभि का विवाह सुखपूर्वक संपन्न हो गया था और अब उसकीविदाई होने वाली थी।   विदाई से ठीक पहले सुरभि की सास ललिता,आशा देवी को बुलाकर कहने लगी कि आपकी बेटी की विदाई बिना कार के कैसे होगी? कार तो आपने दी … Read more

ओहदे का मान – पुष्पा जोशी

        आज बैशुमार दौलत के मालिक रविन्द्र बाबू अपने घर के बराण्डे में अकेले बैठे थे, कहने को बहुत इज्जतदार थे, हर तबके के लोग उनकी इज्जत करते थे, इज्जत से बात करते थे, वे नजर घुमाकर जिसे भी कोई कार्य कहते वह अपने को खुशकिस्मत समझता था। यह इज्जत उनकी थी या उनके आसपास … Read more

इज्जतदार ( इंसान या वहशी जानवर ) – संगीता अग्रवाल

” पापा आ गये ..पापा आ गये !!” जैसे ही ऑटो रिक्शा चलाने वाले जीवन ने घर मे कदम रखा उसके दोनो बच्चे मचलते हुए बोले । ” अरे मेरे बच्चो !” बोल जीवन दोनो बच्चो को गोद मे उठा लेता है । अपने बच्चो का हँसता चेहरा देख उसकी सारी थकान उतर जाती है। … Read more

बड़ी बहू – गरिमा चौधरी 

सुबह के आठ ही बजे थे, पर शर्मा हाउस की रसोई में पूरा युद्ध–सा माहौल था। गैस पर चाय चढ़ी थी, दूसरे बर्नर पर दूध उबलने को था, तवे पर पराठा सिक रहा था और बीच में घिरी खड़ी थी काव्या – घर की बड़ी बहू। तभी पीछे से तीखी आवाज़ आई –“भाभी! कितनी बार … Read more

कभी–कभी बहू की इज़्ज़त का बोझ भी पति के कंधों पर होना चाहिए – ममता  यादव

“आख़िर कब तक मैं ही इन सबकी ख़ुशी के लिए अपनी हर छोटी–बड़ी इच्छा कुर्बान करती रहूँगी, आदित्य? मेरी पसंद, मेरे मन का कोई मोल नहीं तुम्हारे लिए?”स्नेहा अलमारी से कपड़े निकालते–निकालते अचानक रुक गई। उसकी आवाज़ में रूका हुआ रोष और बरसों की थकान दोनों घुल गए थे। आदित्य लैपटॉप बंद करते हुए बोला,“फिर … Read more

पर घर अलग होना ज़रूरी है – सीमा श्रीवास्तव 

“मम्मी, ये भी कोई बात हुई? हर बार विवेक की तरफ़ से हम ही खड़े हों, तो वो कब जिम्मेदार बनेगा?” सान्या ने रसोई के दरवाज़े पर खड़ी-खड़ी आवाज़ थोड़ी धीमी, लेकिन साफ़ रखी। शांता देवी ने बर्तन में दाल चलाते हुए माथे पर पल्लू टिकाया,“अरे बहू, तू हर वक्त हिसाब ही करती रहती है। … Read more

मायका और ससुराल दो अलग दुनिया नहीं – मुकेश पटेल

 रीना को  ऑफिस की छुट्टियाँ मुश्किल से मिली थीं और उसने मन ही मन तय कर रखा था – “इस बार तो पूरा हफ्ता बस आराम… सीरियल, मोबाइल और चैन की  नींद… किसी रिश्तेदार, किसी पड़ोसी के चक्कर में नहीं पड़ना।” अंदर से उसकी सास सरोज की आवाज़ आई – “रीना बेटा, जरा इधर तो … Read more

 बेचारी नहीं हैं हम – विभा गुप्ता 

        आज सुबह से ही किशोरी के छोटे-से घर में लोगों का आना-जाना लगा हुआ था।सभी आकर उसे बधाई देते और कहते,” वाह किशोरी! तेरी बेटी ने तो कमाल कर दिया।” जवाब में वो सिर्फ़ मुस्कुरा देती क्योंकि वो जानती थी कि कल तक यही लोग तो मेरी बेटी को मर जाने की बद्दुआ देते रहे … Read more

जब मां की नसीहत बेटी पर पड़ी भारी – स्वाती जैंन

सोनी , तुम सास के पास गांव जाकर क्या करोगी ? उन्होंने वैसे भी वहां अपनी बेटी को बुला रखा हैं तो तुम भी यहां मायके दिवाली मनाने आ जाओ , सास – ससुर को कितना भी अपना बना लो वह कभी माँ- बाप नहीं बन सकते ! सोनी की मां ममता जी सोनी से … Read more

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