सिंदूर – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

वृंदा, कल समय पर तैयार हो लेना , मानव का रिश्ता तय हो गया और बहू को अंगूठी पहनाने चलना है तुम्हें और बुआ जी को हमारे साथ । भाभी, मम्मी जी को कह दूँगी, अभी तो वो मंदिर गई है पर माफ़  करना , मैं नहीं जा पाऊँगी ….. क्यों….. नहीं-नहीं चलना है । … Read more

बोझ – आराधना सेन : Moral Stories in Hindi

जब सिन्दूर पडेगा ना मेरी बिटिया के माथे पर तो कितना चेहरा मे रौनक आयेगी यह तुम्हे नही पता, बेकार मे चिंता करती हैं वह लोग भी अच्छे नही थी देखना उससे भी अच्छे रिश्ते आयेंगे दादी न जाने कितनी ही बाते बडबडा रही थी माँ चूल्हे मे रोटियाँ सेंक रही थी जो कभी जल … Read more

झांसी की रानी – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

    ” भाभी…मेरे स्कूल का टाइम हो रहा है..टिफ़िन तैयार कर दीजिये।” श्रुति ने बिस्तर पर लेटी अपनी भाभी से कहा।    ” अभी देती हूँ…।” कहते हुए नंदिता उठने की कोशिश करने लगी तभी तनुजा आ गई और बोली,” दीदी..आप आराम कीजिये..श्रुति अपना टिफ़िन खुद तैयार कर लेगी।”    ” लेकिन छोटी भाभी…मुझे पराँठे बनाने नहीं आते..और … Read more

खुद का संडे – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

नीलांश कई दिनों से देख रहा था कि निली काफी उदास और गुमसुम सी होती जा रही है।बस मशीन की तरह अपना काम निपटाती रहती है।ना हँसना न खिलखिलाना। माँ-पापा की चाय, बिट्टू-पिंकी की पढ़ाई, लंच-डिनर, उसका टिफिन, घर की साफ-सफाई सब काम बिल्कुल परफेक्ट, समय पर लेकिन खुद बिल्कुल बुझी-बुझी सी। जब भी नीलांश … Read more

सिंदूर – पूजा मिश्रा : Moral Stories in Hindi

आज फिर गंवार की तरह मांग भर सिंदूर लगा कर चल दी ,कितनी बार कहा है मुझे तुम्हारा इस तरह तैयार होना अच्छा नहीं लगता ।  अरे प्रवेश सुहागिन को सिंदूर लगाना चाहिए इसीलिए लगाती हूं  अच्छा अगर नही लगाओगी तो सुहागन नही हो ,तुम मेरी पत्नी हो ये सब जानते है पर इस तरह … Read more

जिम्मेदारियां और जीवन एक दूसरे के पूरक हैं – सरोजनी सक्सेना : Moral Stories in Hindi

जिम्मेदारियां और जीवन एक दूसरे के पूरक हैं ! दादी मां कहा करती थी लाडो पढ़ाई के साथ साथ मम्मी के साथ थोड़ा काम भी करवा लिया करो, तेरी मां पर घर की जिम्मेदारियां बहुत हैं ! सारा दिन काम कर के थक जाती हैं ! मैं ज्यादा उनकी बातो पर ध्यान नहीं देती थी … Read more

सिंदूर हो रहा दूर – रोनिता : Moral Stories in Hindi

क्या बात है? कुछ दिनों से देख रहा हूं बड़ी बदली बदली सी दिख रही हो? अमर ने अपनी पत्नी मनीषा से कहा  मनीषा:  अच्छा आपको अपने काम के अलावा कुछ और भी दिख गया? पर यह अजूबा कैसे हो गया? अमर:  क्या मतलब? काम पर ध्यान नहीं दूंगा तो यह घर कैसे चलेगा? तुम … Read more

सन्नाटा – पूनम शर्मा : Moral Stories in Hindi

आसमान सूर्य की लालिमा से नीलाभ रंग में परिवर्तित होकर कालिमा के आगोश में समा रहा था । इन परिवर्तनों से अनजान सुषमा कागज कलम में व्यस्त थी। तभी हिरावती ने आवाज़ देते हुए कहा-” मैडम जी! अंधेरा हो गया, घर चलिए, बहुत देर गया है। ” सुषमा बिना नजर उठाए बोली-” तूं चली जा, … Read more

फिर,वसंत लौट आया – महेश केशरी : Moral Stories in Hindi

‘बेटी मेघा, सिन्हा साहब के लिए चाय ले आओ’ रंजीत बाबू ने बैठक से ही आवाज लगाई। मेघा किचन से ही आवाज देती हुई बोली, ‘हाँ, पापा बस दो मिनट, और रुकिए, अभी लाती हूँ ।’ ट्रे में चाय उठाये, मेघा, कुछ ही देर में आकर बैठक में दाखिल हुई। मेघा, साँवली सी, पतली, लंबी … Read more

ये कैसा रिश्ता – उषा भारद्वाज : Moral Stories in Hindi

    हर वक्त उसकी आवाज कानों में गूंजती रहती थी घर पहुंचते ही वह ऐसे चिल्लाता था जैसे किसी के स्वागत का सारा जिम्मा उसका हो।           मुझे याद आने लगा वह दिन , जब मै  कॉलेज से आकर बैठी थी उसी समय  चिंकी ने आकर कहा -दीदी देखो आज हम लोग आपके लिए कुछ लाये हैं … Read more

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