इज्जतदार – बीना शुक्ला अवस्थी

राजेन्द्र जी घर के बरामदे में बैठे अखबार पढ रहे थे। मातंगी अपने स्कूल गई थी। अचानक उन्होंने देखा कि बाहर का गेट खोलकर बेटा समर्थ और बेटी सुचित्रा अन्दर आ रहे हैं। राजेन्द्र खुश हो गये – ” अरे…. आओ,…. आज एक साथ….. और बच्चे, बहू और दामाद कहॉ हैं? “ ” हॉ, पापा। … Read more

इज्जतदार – सीमा गुप्ता

“नवीन जी, बहुत-बहुत धन्यवाद। आपकी समय पर मदद से मेरा बेटा बिल्कुल ठीक हो गया… वरना हम तो घबरा ही गए थे।”  “मिसेज़ एंड मिस्टर नवीन, थैंक्यू सो मच फॉर योर कोऑपरेशन!” फंक्शन में आए पड़ोसी, नवीन और उसकी पत्नी नीरू की ओर मुस्कुराते हुए सिर हिलाकर आभार जता रहे थे। यह दृश्य जितना सहज … Read more

इज्जतदार – सुदर्शन सचदेवा

आजकल की दुनिया चकाचौंध से भरी है—लाइटें, लाइक्स, फॉलोअर्स और दिखावे की दौड़। इसी दुनिया में रहता था राघव, जो एक छोटी-सी पारिवारिक दुकान संभालता था। दुकान साधारण थी, पर राघव की पहचान उसके पहनावे या मोबाइल से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार से होती थी। मोहल्ले में लोग उसे “इज़्ज़तदार लड़का” कहते थे—क्योंकि उसके बोल … Read more

इन आंखों में ही जिंदा है मेरा बेटा – डॉ बीना कुण्डलिया 

देख नहीं सकती, अरे अंधी है क्या ?  जाने कैसे कैसे लोग सड़क पर उतर आते हैं ?  तेज रफ्तार फराटे दार भागती गाड़ी में से गर्दन निकाल उस नवयुवक के बोल सुनकर उसकी गाड़ी के धक्के से नीचे गिरी कंचन ने खुद को तो बहुत ही मुश्किल से संभाला ।  कंचन बड़बड़ाई मैं तो … Read more

इज्जतदार – डाॅ संजु झा

वक्त का कुछ भी नहीं पता चलता है।एक समय गोविन्द जी का परिवार काफी इज्जतदार था। आस-पास के गाॅंवों में भी उनके परिवार की काफी इज्जत थी।यह इज्जत उनके पुरखों ने अपने सत्कर्मों से कमाई थी, परन्तु अप्रत्याशित  रूप से वक्त का पहिया ऐसा घूमा कि उन्हें अपनी जन्मस्थली तक छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। … Read more

सपने – रेखा जैन

“कुसुम चाय बन गई क्या?” सुबह सुबह में सासु मां की तीखी आवाज आई। “लाई मां, बस जरा अनु का टिफिन पैक कर लूं फिर मैं आपको आपकी चाय देती हूं!”  “लो सुबह सुबह में इस लड़की के पढ़ाई के नाटक शुरू हो गए। जाने कौनसी कलेक्टर बनाएगी इसे! इतना ज्यादा लड़कियों को नहीं पढ़ाना … Read more

माता-पिता की आर्थिक स्थिति तय करती है ससुराल में सम्मान – आराधना श्रीवास्तव

आंखों में सपना सजाये मखमली एहसास लिए सलोनी डोली में विदा हो ससुराल आई ।  नाम के अनुरूप उसकी छवि उतनी ही निराली और आकर्षक, जो एक नजर देख ले तो देखता ही रह जाए । विवाह के तीन-चार दिन तक तो दुल्हन की मुंह दिखाई की रस्म चलती रही जो ही देखता बलाइया लेते … Read more

संतुलन – एम. पी. सिंह 

अशोक और आशा कि शादी को ज्यादा दिन भी नहीं हुए थे कि ननद भाभी मैं शीत युद्ध शुरू हो गया. ननद कोमल वैसे तो भाभी कि हमउम्र और पड़ी लिखी थी, पर माँ और भाई का आशा कि प्रति प्यार सहन नहीं हो रहा था. कोमल रोज़ शाम को भाई से भाभी कि शिकायत … Read more

अधिकार कैसा… – रश्मि झा मिश्रा –

…सीमा चहकते हुए मां के कमरे से निकली… निकलते ही उसका सामना भाभी से हो गया… भाभी ने उसके चेहरे की तरफ गौर से देखा… एक पल को रुकी… लेकिन कुछ बोली नहीं… सीमा के कानों में मां के झुमके झूल रहे थे…  भाभी रोशनी सीधे मां के पास जाकर, शिकायत भरे लहजे में बोली…” … Read more

इज्जतदार – नीलम शर्मा

सुहानी अपनी सहेली के यहांँआई थी। उसे बैठे हुए कुछ ही समय हुआ था कि मीना बोली सुहानी बाहर मौसम खराब सा हो रहा है, शायद बहुत तेज बारिश आएगी। सुहानी बोली मैं चलती हूं कभी घर जाना ही मुश्किल हो जाए। देख ले कहीं रास्ते में ही बारिश न आ जाए। अरे नहीं यह … Read more

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