अपराधबोध – बबीता झा
आज जब लिखने बैठी, तो अपने साथ हुई घटना याद आ गई, और अपनी कहानी को उसी सांचे में ले गई। मेरी ननद, जिन्हें मैं अपनी मां के बाद उन्हीं को स्थान देती थी, अगर मेरे से कोई गलती होती तो वही समझा देती थी। और मुझे ही क्यों, परिवार के हर सदस्य को जोड़कर … Read more