माँ मै आज से अलग घर मे रहने जा रहा हूँ सलोनी के साथ। क्यों बेटा उर्मिला जी ने पूछा बेटे कपिल से, क्योंकि सलोनी अब इस घर मे आप लोगो के साथ नहीं रहना चाहती। तभी पीछे से सलोनी आ गई। इसी महारानी ने तुझे भडकाया होगा वरना मेरा बेटा तो ऐसा नहीं है जो हम लोगो को अकेला छोडकर जाए।
नहीं माँ जी मैने कपिल से कुछ भी नहीं कहा है, मै तो इन्हें मना कर रही थी कि मम्मी पापा को इस उम्र मे अकेला छोड़ कर नहीं जाते कैसे रहेगे वो लोग अकेले। मै तो इनसे कह रही थी कि बह मुझे कुछ समय के लिए मायके छोड आइये। अच्छा अच्छा रहने दे सफाई देने को, पहले पति के कान भरेगी फिर ऐसी सफाई देगी कि खुद ने कुछ किया ही नहीं है। नहीं मम्मी जी मैने आपके बेटे के कोई कान नहीं भरे हैं।
हाँ माँ सलोनी ने मुझसे कुछ नहीं कहा है। वो कमरे मे बैठी रो रही थी तो मैने पूछ लिया क्या हो गया सलोनी तब वो बोली कपिल मै इस घर के हिसाब से चलने की बहुत कोशिश करती हूँ पर कर नहीं पाती हूँ। कही न कहीं कुछ रह ही जाता है। और माँ जी फिर मुझ पर चिल्लाने लगती है
कि माँ बाप ने कुछ सिखाया नहीं है क्या। मै क्या करूँ मै इस घर के लिए पूरी तरह परफेक्ट नहीं हो पा रही हूँ। इस लिए मैने कहा कि आप मुझे मायके छोड आएं और फिर एक अलग से मकान ले तो मै रहने आऊंगी बस।
उर्मिला और अशोक जी के परिवार में एक बेटा कपिल और बेटी मुक्ता थी । बेटी की शादी पहले हो चुकी थी वह अपने ससुराल में थी ।और कपिल की शादी अभी 6 महीने पहले हुई है अशोक जी बैंक से रिटायर थे अब घर पर ही रहते थे । बड़े हंसी खुशी से शादी करके बहू सलोनी को अपने घर लाए थे।
शादी के बाद कुछ दिन तो बहुत अच्छे गुजरे सलोनी के उर्मिला और अशोक जी के साथ। सास ससुर दोनों का व्यवहार बहुत अच्छा था सलोनी के साथ।लेकिन जब सारे मेहमान चले गए मुक्ता भी अपने ससुराल चली गई ,तो धीरे-धीरे घर की सारी जिम्मेदारी बहू सलोनी पर डाल कर उर्मिला जी निश्चित हो गई ।
अभी तक तो पूरा घर वही संभालती थी, हां बर्तन साफ करने वाली और झाडू पोछा वाली घर आती थी । बाकी नाश्ता खाना कपड़े और घर की और जिम्मेदारी यां सलोनी के मत्थे मढ दिया उर्मिला ने और खुद फुर्सत हो गई।
सलोनी सारा दिन घर के काम में लगी रहती । सलोनी के घर से इस घर के तौर तरीके कुछ अलग थे। सब परिवारों में अलग तौर तरीके होता है खाना नाश्ता सभी का हिसाब किताब होता है। किसी परिवार में हल्का नाश्ता चलता है तो कहीं पर भारी। कहीं सिंपल बनती है तो कहीं ज्यादा तेल मसाले वाली सब्जी।
अब एक परिवार से दूसरे परिवार में आने पर सब कुछ बदल जाता है। यही सलोनी के साथ भी हुआ उसके घर में कोई तेल नहीं खाता था दाल में तड़का तक तो ठीक था लेकिन उसके मायके में सब्जी वगैरह भी सब घी बनती थी। और वहां यहां ससुराल में सब सब्जी तेल में।
सलोनी को की आदत भी ऐसी ही पड़ गई थी। एक दिन जब सलोनी ने सब्जी बनाई थी भिंडी को घी में बना दिया, और जब सब खाने बैठे थे यह क्या किया है तुमने तरीका नहीं है क्या भिंडी की सब्जी कोई घी में बनाता है । घी में बनी सब्जी कौन खाता है। वह मम्मी जी मेरे घर में ऐसे ही बनता है ।
तो हमसे पूछना चाहिए था ना सारा खाना बेकार कर दिया । तभी बीच में अशोक जी बोल पड़े अरे उसको इस घर के तौर तरीके सिखाओ। उसको बताओ की सब्जी कैसे बनती है। यह लो इतनी बड़ी लड़की को अब मैं तौर तरीके सिखाऊं, मां ने तुम्हारी कुछ नहीं सिखाया क्या तुम्हें ।
आज सलोनी गैस पर दूध चढ़कर फ्रिज से कोई सामान निकालने लगी तभी दूध उबलकर गैस के नीचे गिर गया और तभी उर्मिला की रसोई में आ गई । है राम जरा भी शऊर नहीं है देखो तो सारा दूध गिर गया नुकसान और हो गया, और गंदगी और फैल गई। देखो बहू जो भी काम करो मन लगाकर करो ध्यान से करो ।
और मुझे रसोई में गंदगी बिल्कुल पसंद नहीं है मैं तो कितना साफ सुथरा रखती थी अपनी रसोई को और वैसे ही मिलनी चाहिए । न जाने कैसी लड़कियां है आजकल की तरीका कि नहीं है काम करने का। देखो बहू सब काम परफेक्ट होना चाहिए जैसा मैं करती थी।
तभी अशोक जी पत्नि से बोले मेरी सफेद वाली शर्ट दे दो मुझे थोड़ा बाहर जाना है। अच्छा जी कहके उर्मिला जी र्शट को इधर-उधर देखने लगी। अशोक जी ने पूछा क्या हुआ मिला नहीं क्या, हां देखती हूं कल बहू को दिया था धोने के लिए । क्या अब हर काम बहू ही करेगी क्या, अभी तक घर के सारे काम तुम ही करती थी ना ,यह बहू के आ जाने से हर चीज उसे पर क्यों डालती हो।
अरे गुस्सा ना करें मैं देखती हूं । उर्मिला जी बाहर बालकनी में कपड़े देखने गई तो सफेद शर्ट स्टैंड पर डाली थी । उतार कर ले आई और वह भुनभुनाते हुए बहू के कमरे तक गई, क्या बहू तुमने पापा की र्शट प्रेस नहीं करी । लेकिन उनकी बात का कोई जवाब नहीं मिला
तो दरवाजा खोल के कमरे में गई तो देखा सलोनी सो रही थी। और उर्मिला जी ने जगाया शाम की 5:00 बज रहे हैं यह कोई सोने का समय है क्या । बस काम से जी चुराती रहती है पापा का र्शट प्रेस क्यों नहीं करा उन्हें बाहर जाना है। वह बस समय नहीं मिला समय नहीं मिला, बस बहाने तो तुम्हारे मुंह पर रखे रहते हैं।
और मां मेरी आज थोड़ी तबीयत ठीक नहीं लग रही है। पापा को दूसरी शर्ट दे दे पहनने को मैं बाद में कर दूंगी। लेकिन उन्हें तो यही शर्ट पहनी है उठो और करके दो सलोनी बेमन से उठी और र्शट प्रेस करने लगी।
शाम को ऑफिस से जब कपिल घर आया तो देखा सलोनी कमरे में बैठी रो रही है ।और माँ बाहर पार्क में बैठी गप्पे लगा रही है । पापा भी नहीं थे घर पर । क्या हुआ सलोनी तुम रो क्यों रही हो पूछते हुए कपिल सलोनी के पास चला गया था। तो हाथ पकडा तो गरम था । क्या सलोनी तुम्हें बुखार है क्या हां कपिल दोपहर से ही मेरे हाथ पैर मे बहुत दर्द हो रहा था
तो मैं आकर लेट गई। तो इसमें रोने की क्या बात है आराम करो । लेकिन अभी थोड़ी देर पहले मम्मी जी पापा का शर्ट लेकर आई थी और तबीयत ठीक नहीं थी मेरी तभी मुझे पापा शर्ट प्रेस करवाई । तो तुम मना कर देती ना, किया था माना कपिल, लेकिन उन्होंने कहा पापा को यही र्शट पहननी है तो करो इसमें प्रेस।
कपिल को गुस्सा आया सलोनी कुछ नहीं बोलती तो माँ तो ज्यादती ही करती जा रही है।
रात के खाने का समय हो गया तो उर्मिला जी कहने लगी अरे सलोनी खाना नहीं बनेगा क्या। तभी कपिल कमरे से बाहर आया और बोला आज बाजार से खाना आएगा क्यों बेटा ,बस आज घर में खाना नहीं बनेगा। खाना बाहर से आ गया और सबने चुपचाप खा लिया।सब खाना खाकर सोने अपने कमरे में चले गए।
कपिल सोचता रहा मम्मी के इस तरह की व्यवहार से तो सलोनी एक दिन बगावत कर देगी। आखिर कबतक कोई ऐसे बरदाश्त करेगा।
हां उसके ऐसे संस्कार नहीं है। लेकिन एक बंदा आखिर कब तक बर्दाश्त करता रहेगा। आखिर कोई ना कोई रास्ता तो निकालना ही पड़ेगा ना । दूसरे दिन सुबह कपिल ने सलोनी से कहा सुनो तुम कुछ दिन के लिए मायके चली जाओ क्यों, ऐसे ही देखो मैं इस घर में मां और तुम्हारे बीचसब ठीक करना चाहता हूँ। अच्छा कपिल ठीक है। सुबह सलोनी अपनी अटैची लेकर बाहर आई ।
तभी अशोक जी ने पूछा अरे अटैची लेकर कहां जा रही हो तुम लोग ।तो वह पापा सलोनी अपने मायके जा रही है कपिल बोला। क्यों उर्मिला जी बोली ,क्योंकि अब वह यहां नहीं रहना चाहती । तब तक मैं कोई दूसरा घर देख रहा हूं रहने के लिए। अशोक जी बोले क्यों बेटा क्या हो गया।
पापा मां और सलोनी की पट नहीं रही है।।और अब हम लोग अलग रहेंगे । अच्छा तो सलोनी ने कान भर दिए तुम्हारे उर्मिला जी बोली।
कान नहीं भरे मम्मी मैं भी तो देख रहा हूं घर का माहौल । अब कल सलोनी की तबीयत ठीक नहीं थी तब भी आपने उसे पापा की र्शट प्रेस करवाई क्या। सलोनी को बुखार था अशोक जी बोले ,हां पापा अच्छा। ये तुमने बहुत गलत किया उर्मिला। बहू की तबियत ठीक नहीं थी तो क्यों उसे परेशान किया। क्यों उससे जबरदस्ती प्रेस करवाए।
देखो उर्मिला मैं कब से तुमसे कह रहा हूं इस तरह से हर बात में बहू को रोकटोका टोकी ना करो। और बहू के आते ही तुम्हें सारे काम उसको ही सौप दिए है।
उसके आने से पहले तक सारा काम तुम ही करती थी ना। और तुमको हर काम परफेक्ट चाहिए। आखिर तुम्हारी और उसकी उम्र में फर्क है वह इतनी जल्दी हर काम में कैसे परफेक्ट हो सकती है । और एक औरत होकर ही एक औरत को नहीं समझती। कभी तुम भी तो इस उम्र की थी क्या उसे समय तुम हर काम परफेक्ट कर लेती थी। तुम औरतों को जाने क्या हो जाता है सास बनते ही सास वाला रूप दिखाने लगती हो
अरे सलोनी को उसके मां-बाप ने अच्छे संस्कार दिया है कि वह तुमको कुछ उल्टा सीधा जवाब नहीं देती। नहीं तो घर में रोज लड़ाई झगड़े होते रहे। समझदार हैं सलोनी अशोक जी बोले। नहीं तो और घरों में जाकर देखो बहुएं सास ससुर की कोई इज्जत नहीं करती। सलोनी बेटा तुम मायके नहीं जाओगी नाराज होकर वैसे मम्मी पापा से मिलने जाना हो तो जा सकती हो । अपने घर में आराम से रहो। जितना हो सके उतना कम करो ना हो सके
तो कामवाली और लगा लो। बेटा कपिल दूसरा घर लेने की कोई जरूरत नहीं है यह घर हम सब का है बेटा समझे जी पापा। अरे मै तो थोड़ा मम्मी को डरा रहा था समझा रहा था हम लोग दूसरे घर नहीं जाएगें। सलोनी ही जानेको नहीं तैयार है कहती है मम्मी पापा को अकेले छोडकर नहीं जाना है।
अरे उर्मिला तुम,,तुम समझ जाओ और तुम अभी इतनी बूढ़ी भी नहीं हुई हो कि घर का काम ना कर सको । बहू के संग मिलकर घर की थोडी जिम्मेदारी तुम भी संभालो। यह क्या की बहू आ गई तो हर काम करना उसी की ही जिम्मेदारी हो गई है। ठीक है जी आप सही कह रहे हैं आप आगे से ऐसा नहीं होगा उर्मिला जी बोली।सच में बहु को उसकी मम्मी पापा ने अच्छे संस्कार दिया है नहीं तो वह भी मुझे उल्टा सीधा जवाब देती ।
घर में क्लेश मचाती है तो घर में रहना और भी मुश्किल हो जाता । हां समय रहते समझ गई अच्छी बात है । अपना वह सास वाला रूप छोड़कर थोड़ा प्यार दिखाओ आखिर वह भी किसी की बेटी है घर की नौकरानी थोडे ही है। अच्छी संस्कारों वाली लडकी है समझ गई बात बहुत अच्छा। चलो भाई चाय बना लाओ सब बैठकर पीते है।
मंजू ओमर
झांसी उत्तर प्रदेश
18 जून