आत्मग्लानि – गरिमा चौधरी 

कमला जी हमेशा से अपने परिवार की धुरी थीं—तीन बेटों की माँ, घर-आँगन की मालकिन, और मोहल्ले में सभी के सुख-दुख की साझेदार। घर में उनकी बात पत्थर की लकीर मानी जाती थी। लेकिन बीते दो सालों से उनके चेहरे की कोमलता में एक खिंचाव आ गया था। कारण सिर्फ एक—बहू मालिनी को संतान का … Read more

अदालत का अनोखा फैसला – एम. पी. सिंह 

आनंद ने एक हाथ से डोर बेल बजाई, दूसरे हाथ मै मिठाई का डिब्बा और नज़रे नेम प्लेट पर टिकी थी, जहाँ लिखा था ” रिटायरड जज ठाकुर अरविन्द सिंह”. जज साब ने दरवाजा खोला, और आनंद को सामने खड़ा देखकर बोले, मैंने तुम्हे पहचाना नहीं? आनंद ने आगे बढ़कर पाँव छुए और बोला, मै … Read more

आंखों का पानी ढलना – सुदर्शन सचदेवा

शहर के एक नामी अपार्टमेंट में रहने वाली अनन्या को लोग “सक्सेसफुल” कहते थे। बड़ी कंपनी, ऊँचा पद, चमकती कार और सोशल मीडिया पर परफेक्ट तस्वीरें। मगर इस चमक के पीछे कहीं कुछ सूख गया था—उसकी आँखों का पानी। एक समय था जब अनन्या छोटी-छोटी बातों पर भर आती थी। किसी की पीड़ा देखकर उसका … Read more

दरार -पूजा अरोड़ा

शादी का माहौल था चारों तरफ गहमा गहमी थी। एक ओर हलवाई कड़ाही में गर्मा गर्म पूरिया तल रहे थे तो दूसरी ओर टेंट वाला फूलों से सजावट कर रहा था।  सब काम सुचारू रूप से चल ही रहे थे परंतु फिर भी यूं लग रहा था जैसे कुछ काम नहीं हो रहा..! यही तो … Read more

स्वार्थ खत्म दुर्व्यवहार शुरू – रोनिता कुंडु

काजल… आज सीमा चाची के यहां सतसंग है तो मुझे हाथ बटाने थोड़ा पहले ही जाना होगा, तो पीछे से जब विमला आएगी तो उससे याद से ऊपर वाला कमरा अच्छे से साफ करवा लेना, विभा जी ने अपनी बहू काजल से कहा..  काजल:  मम्मी जी! अचानक ऊपर वाले कमरे की सफाई? वह कमरा तो … Read more

मैं भी तो एक बेटी ही हूं – मधु वशिष्ठ

निशा का घर दूर मैसूर में था और नीता आगरा की ही थी। क्योंकि कॉलेज की 5 दिन की छुट्टियां थीं तो दिल्ली का लगभग सारा हॉस्टल ही खाली हो रहा था। निशा का मैसूर तक आना और जाना 5 दिनों में तो संभव ना होता इसलिए उसने भी नीता के साथ उसके घर ही … Read more

मै भी एक बेटी हूं – निशा जैन

अरे रश्मि बेटा आज भी इतनी जल्दी उठ गई, आज तो रविवार है , आराम से उठ जाती। रोज़ तो पांच बजे उठती हो बच्चों के स्कूल की वजह से, रश्मि की सास आशा जी बोली मम्मी आपको और पापाजी को उठते ही चाय और गर्म पानी चाहिए इसलिए मैं उठ गई । आज सर्दी … Read more

मै भी तो एक बेटी हूं – विनीता सिंह

आज रमेश जी कुर्सी पर बैठे अपनी मां शन्ति देवी से बात कर रहे थे ।तभी वहां प्रिया आई और बोली पापा मां बुला रही है ।शान्ति देवी ने कहा रमेश बेटा जल्दी जा देख। बहू को परेशानी होगी। इसलिए बुला रही है और फिर शान्ति देवी भगवान के हाथ जोड़कर कहने लगी । भगवान … Read more

घर – खुशी

नियति दो भाइयों में सबसे छोटी और लाडली थी।भाइयों की शादी हो चुकीं है।नीला और संजना उसकी भाभियां और श्रीसागर,आनंद उसके भाई जिनका अपना प्रिंटिंग प्रेस था जो पिता घनश्याम जी ने खोला था उनकी पत्नी दमयंती जो एक ऐसी महिला थी जो हर रिश्ते को बड़े सलीके से निभाती थी । नियति मास्टर्स कर … Read more

मां जी मैं भी आपकी बेटी जैसी हूं – सीमा सिंघी

अरे डोली बहू तुम रसोई का काम देख लो और हां तुम रसोई में दही बड़े, दाल का हलवा पुलाव और थोड़ी पुड़िया तल लेना। तुम्हारी जेठानी बाहर की साफ सफाई सब कर लेगी। वैसे भी रसोई में दो इंसानों का काम तो है नहीं।  मैं तो अपने जमाने में मिंटो में बहुत कुछ कर … Read more

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