अपनों से गैर भले। – नीलम गुप्ता
मेरी नानी अक्सर कहां करती थी – अपनों से गैर भले मैं सुनती तो सोचती ऐसा कैसे हो सकता है भला गैर अपनों से अच्छे कैसे हो सकते हैं अपनों के साथ हम अपना सुख दुख साझा करते हैं खुशी हो या गम अपने ही घर परिवार के लोगों को बुलाया जाता है वही हमारा … Read more