आश्रिता – शुभ्रा बैनर्जी
“देखिए ना,हमारे ऊपर तो इतनी बड़ी जिम्मेदारी है,कहीं भी आना-जाना नहीं कर सकते हम।आप लोगों की तरह मैं स्वतंत्र तो हूं नहीं।मंहगाई है कि बढ़ती जा रही है,और खर्च है कि कम होते ही नहीं।बुढ़ापे में बीमारी भी बिन बुलाए मेहमान की तरह आ जाती है।मैं तो आप लोगों के साथ ट्रिप पर नहीं जा … Read more