स्नेह का बंधन – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

मत रो बिटिया मां चली गई तो क्या हुआ बाबू जी तो है ,हम है मायके आती रहना इतना कहकर शकुन्तला ने दोनों बेटियों को गले लगा लिया और दोनों के हाथों में दस ,दस का एक-एक नोट रख दिया।और खुद भी आंसू पोंछने लगी। बिटिया जो आया है संसार में वाको तो एक दिन … Read more

दोस्ती का मान – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

 ” स्वाति बेटा…किसी के दिये उपहार को यूँ फेंककर अपमान नहीं किया करते।” बेटी द्वारा फेंके गये पर्स को फ़र्श से उठाकर उसे देती हुई कामिनी बोली।तब स्वाति उन्हें पर्स के पीछे लगे प्राइस टैग को दिखाते हुए तल्ख-स्वर में बोली,” इसका प्राइस तो देखिये…सिर्फ़ सौ रुपये…उँह! इससे ज्यादा कीमत की तो मेरे पास पेन … Read more

दगड़ाबाई चा गुत्ता! – कुसुम अशोक सुराणा : Moral Stories in Hindi

अमावस की रात में झींगुरों की झीं-झीं के बिच, सूखे पत्तों को रौंद कर एक आवाज़ रात की ख़ामोशी को चीरती हुई दगडाबाई के कानों में गर्म शीशे सी पहुँची और कुछ ही पलों बाद उसे ऐसे लगा मानों कोई उसका पल्लू खींच रहा हैं! ऊँची-ऊँची घास के बिच एक्का-दुक्का ढाबों के आसपास हाइवे से … Read more

दहेज – लतिका पल्लवी : Moral Stories in Hindi

सुधीर, सुधीर कहाँ हो? चिल्लाते हुए सीमा अपने पति के पास पहुंची,जो अपने दोस्तों से गप्पे लड़ा रहा था। उसे दोस्तों के साथ देखकर गुस्साते हुए बोली “कब से तुम्हें बुला रही हूँ, सुनाई नहीं दे रहा, बहरे हो? लगता है मेरे पापा ठगे गए है।” यह सुनकर सुधीर सीमा को आँखे दिखाते हुए बोला … Read more

अनमोल उपहार – शिव कुमारी शुक्ला : Moral Stories in Hindi

सीमा क्या आजकल तुम्हारे स्कूल में छुट्टियां चल रही हैं तुम रोज मम्मी के साथ आ रही हो स्कूल नहीं जाती क्या। यह सुन सीमा की आंखें डबडबा आईं और कुछ नहीं बोली। अरे बोल क्यों नहीं जाती क्या हुआ। सीमा जोर -जोर हिचकियां ले रोने लगी। रागीनी जी घबरा गईं ये क्या हुआ इसे … Read more

“भाभीजी का स्पेस स्टेशन” – डॉ अनुपमा श्रीवास्तवा : Moral Stories in Hindi

   आज के स्त्री विरोधी युग में सुनीता विलियम्स  ‘अंतरिक्ष परी’  जब से आसमान में अपना परचम लहरा कर वापस लौटी है  तब से खासकर भारत की महिलाओं के बीच क्रांति छा गई है। चारो तरफ महिलाओं के महिमा मंडन का डंका बज रहा है।  घर -घर में हर माँ बाप अपनी बेटियों को नसीहते दे … Read more

ऑंसू बन गए मोती – साधना वैष्णव : Moral Stories in Hindi

  अनुभा ओ अनुभा… सास की आवाज सुनकर थकान से बोझिल ऑंखों को अनुभा ने जैसे ही खोला सामने अपनी सास को देखा। वे उसके अनुराग की निशानी को गोद मेें लिए ससुर जी के साथ खड़ी थीं। खुशी से चहक उठीं और बोलीं- देखो बेटी तुमने आज हमारे अनुराग को वापस हमारी गोद मेें देकर … Read more

ऑंसू बन गए मोती – विनीता महक गोण्डवी : Moral Stories in Hindi

अरे …… सुशीला तुम रोज रोज इतनी देर से क्यों आती हो….?  तुम तो जानती हो मुझे ऑफिस जाना है। सुशीला की मालकिन दिव्या ने कहा… सुशीला बिना कुछ कहे … जल्दी जल्दी काम में लग गई। दिव्या को लगा सुशीला कुछ परेशान हैं। दिव्या ने किचन में जाकर सुशीला से कहा…. क्या बात है … Read more

उपहार की कीमत नहीं दिल देखा जाता है। – प्रतिमा श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

कुसुम जी के तेवर में आज सख्ती थी।बहू रीत की मां ने सबके लिए कुछ उपहार स्वरूप कपड़े, मिठाइयां और लिफाफे भेजे थे क्योंकि रीत की पहली दीपावली थी। रीत ” तुम्हारी मां को हमारी हैसियत का बिल्कुल अंदाजा नहीं  है। ऐसे कपड़े हमलोग नहीं पहनते हैं, अगर देना है तो ढंग की चीजें भेजा … Read more

पश्चाताप – अपर्णा गर्ग : Moral Stories in Hindi

कमरे की छत से पानी टपक रहा था, ज्योति कभी एक तरफ बर्तन रखती, तो कभी दूसरी ओर… न तो बारिश रूक रही थी और न ही उसके पास और बर्तन बचे थे, जिसे वो टपकते हुए पानी के नीचे लगा दे। हे भगवान! अब तो रहम करो, कब तक बरसोगे। ऐसा लग रहा हैं … Read more

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