लक्ष्मी: मेरी नन्ही गुरु – सीमा गुप्ता

लक्ष्मी से मेरा रिश्ता अचानक बना जो न किसी परिचय का मोहताज है और न ही किसी वादे का। वह चुपचाप आई, मेरे भीतर उतर गई और मुझे पहले से थोड़ा बेहतर इंसान बनाकर चली गई। बात शुरू होती है, महाशिवरात्रि के पावन अवसर से। महादेव की कृपा से मुझे अपनी बेटियों अदिति और अन्वी … Read more

रेशम के धागे – रवीन्द्र कान्त त्यागी

“ग्रेवाल साहब से मिलना है” केबिन के बाहर से किसी नारी का स्वर सुनाई दिया। “ग्रेवाल साहब तो… अब यहाँ दीक्षित सर देखते हैं।“ रिसेप्सनिस्ट ने उत्तर दिया। एक दंपति ने मेरे केबिन में प्रवेश किया। कुछ पल तो एक फाइल में उलझा रहा। फिर गर्दन उठाई तो सामने हमारे कौलेज की सब से चर्चित … Read more

हम पंछी एक डाल के – रवीन्द्र कांत त्यागी

रोज की तरह सॉफ्टवेयर इंजीनियर अभय सिंह ने अपने घर आकर गैराज में गाड़ी पार्क की, हाथ मुँह धोये और आराम कुर्सी पर अधलेटे पिताजी के चरण स्पर्श करके उनके बराबर में पड़ी कुर्सी पर बैठ गए. “पापा, कंपनी मेरा प्रमोशन करके तीन साल के लिए ऑन डैप्युटेशन जर्मनी भेजना चाहती है. मैंने तो मना … Read more

काश तू फिर से मिल जाती… – रश्मि प्रकाश 

राशि अपने पति निकुंज और चार साल की बेटी कुहू और डेढ़ साल के कुश के साथ अभी दशहरे के वक़्त ही नए शहर में आए थे ।  बेटा अभी छोटा था तो काम करने वाली की खोज जारी थी। अपार्टमेंट हो तो आराम से काम वाली मिल जाती है पर छोटी जगहों पर काम … Read more

रिश्ता निस्वार्थ प्रेम का । – अंजना ठाकुर  

ये क्या मां आप कमला को दस लाख रुपए दे रही हो दिमाग खराब हो गया क्या तुम्हारा राजीव अपनी मां सुधा जी से गुस्से से बोला।सुधा ने राजीव से चेक बुक निकलवाई और उसमें रकम भरी जिसे देख राजीव बौखला गया। सुधा बोली शुक्र करो दस लाख ही कर रही  वो तो ममता आड़े … Read more

कैदी नंबर 214 – गीता वाधवानी

लगभग 22 वर्षीय पंकज को पुलिस इंस्पेक्टर सलाखों के पीछे धकेल कर चला गया। पंकज गिरते गिरते बचा और वहीं कोने में बैठकर अपने घुटनों में मुंह छुपा कर रोने लगा। तब इसी कोठरी में बंद 35-36 वर्षीय मनोज ने उसके कंधे को प्यार से सहलाते हुए पूछा- क्या हुआ भाई,इतना क्यों रो रहे हो? … Read more

मैं किस्मत वाली हूं – मंजू ओमर 

तू कितनी किस्मत वाली है वैशाली, परिवार में कोई भी नहीं है न सास ने ससुर देवर जेठानी ननद अपना आराम से तू और विकास मौज मस्ती में रहते हैं । वैशाली की सहेली भूमि ने कहा। हां सास ससुर है भी तो वो अपने घर में रहते हैं यहां तुम्हारे पास नहीं । अच्छा … Read more

बड़ी बहू होना सम्मान है अधिकार नहीं – सीमा सिंघी

शुभ्रा मैंने तुमसे कितनी बार कहा है । जब भी रसोई में काम करती हो तो पूरा निपटा के ही रसोई से निकला करो। मैं जब भी रसोई में आती हूं तो मुझे रसोई बिखरी हुई ही मिलती है।  न जाने तुम कौन सी दुनिया में खोई रहती हो। जो तुम्हारा काम खत्म होता ही … Read more

माता-पिता को सिर्फ रोटी और छत नहीं, प्यार और सम्मान चाहिए… – अर्चना खंडेलवाल

रमा और गोविंद जी भीतर ही भीतर घुट रहे थे, लेकिन उनकी घुटन से नेहा बिल्कुल बेखबर थी। उसे बस यही भरोसा था कि अब सास-ससुर उसके खिलाफ कोई फैसला नहीं ले सकते, क्योंकि बैंक खाते और प्रॉपर्टी के कागज़ उसी की पकड़ में थे। उसके लिए पैसा ताकत था—और ताकत के आगे रिश्ते अक्सर … Read more

रिश्ते अधिकार से नहीं, करुणा से चलते – सिम्मी मल्होत्रा

सविता की तबीयत दिन-ब-दिन अधिक बिगड़ने लगी थी। वह कई दिनों से बस एक ही बात दोहराती रहती—“मेरी बिटिया को देखना है… एक बार उसे देख लूं… बस एक बार।” उस दिन दोपहर के वक्त फोन बजा। नंबर मायके का था। दिल धक से रह गया, लेकिन जैसे ही मैंने रिसीवर उठाया, उधर से भाई … Read more

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