सावित्री – गीतू महाजन

शमशान घाट की उस पथरीली ज़मीन पर घुटनों के बल बैठे आर्यन का विलाप वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा चीर रहा था। चिता की लपटें आकाश को छूने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन आर्यन की नज़रें सिर्फ़ उस लकड़ी के ढेर पर टिकी थीं, जहाँ उसकी माँ, सावित्री देवी, का नश्वर शरीर पंचतत्व … Read more

आदर्श बहू’ – गीतू महाजन

“सुन रही हो सुमन! देख आरव ने फिर से ड्राइंग रूम में दूध गिरा दिया है। अभी थोड़ी देर में किटी पार्टी की सहेलियाँ आने वाली हैं। अगर फर्श चिपचिपा रहा तो मेरी क्या नाक रह जाएगी? जल्दी आकर साफ कर दे!” सासू माँ कुसुम जी की तीखी आवाज़ बेडरूम के बंद दरवाजे को चीरती … Read more

स्वार्थ या अभिमान – एम. पी. सिंह

नीता छोटी बहु बनकर ससुराल पहुंची, संयुक्त परिवार मैं पति नीरज के आलावा सास ससुर और जेठ जेठानी थे. नीरज एक पढ़ा लिखा सिविल इंजीनियर था और घर परिवार भी अच्छा था. नीता भी एक पढ़ी लिखी संस्कारी लड़की होने के साथ साथ ग्रह कार्य में दुक्ष थीं,  और आते ही घर में सबका दिल … Read more

स्वार्थी – खुशी

रागिनी अपने चार भाई बहनों में सबसे बड़ी थी।पिता जी बैंक में थे और मां गृहिणी अच्छा परिवार सब को एक दूसरे से प्यार था ।रागिनी बारहवीं में थी।उससे छोटा नवीन दसवीं में उससे छोटी रमा सातवीं में और सबसे छोटा हेमंत 2 में। दादा जी का अपना चार कमरों का मकान था जो पिताजी … Read more

एक रिश्ता ऐसा भी  – सीमा सिंघी

अचानक निखिल की गाड़ी मोड पर रुकते ही उसे एक मासूम बच्चे की आवाज सुनाई दी। बाबूजी यह फूल का गुच्छा ले लो। आप मैडम जी के जुड़े में लगा देना। देखो कितने सुंदर फूल है। मैं सच कहती हूं,उन पर बहुत खिलेंगे। न जाने क्यों निखिल न चाहते हुए भी उस मासूम की आवाज … Read more

एक अनाम रिश्ता – शिव कुमारी शुक्ला 

वीना शुक्ला को अभी इस विद्यालय में स्थानांतरित होकर आए दो सप्ताह ही हुए थे किन्तु इतने कम समय में ही उन्होंने नोटिस किया कि कक्षा नौवीं सी की छात्रा सुमन अन्य छात्राओं से कुछ अलग- थलग रहती है।वह ना किसी से बोलती है और ना ही किसी के पास बैठती है।वह चुपचाप गुमसुम सी … Read more

कुछ रिश्ते खून के रिश्तों से बड़े होते हैं – प्रतिभा भारद्वाज ‘प्रभा’

 आज 5 दिन बाद अस्पताल से विनय बाबू को छुट्टी मिलने वाली थी…इन दिनों में उनके साथ लगातार उनकी पत्नी सरला जी ही रहीं वरना कुछ परिचित लोग तो औपचारिकतावश उनसे मिलने आते और हालचाल पूछकर चले जाते। अस्पताल भी घर से दूर था तो कामवाली से भी किसी मदद की उम्मीद नहीं थी अतः … Read more

अनाम रिश्ता – बालेश्वर गुप्ता 

  मुन्ना-मुन्ना, अरे आज तू चाय पीने नहीं गया, क्या हुआ तुझे,तेरी तबीयत तो ठीक है ना?           कुछ नहीं आंटी, ऐसे ही सर  दर्द कर रहा था,उठने को मन ही नही कर रहा था.          देख मैं तेरे लिये चाय और टोस्ट ले आयी हूं. तू चाय पी ले मुन्ना,मैं तुझे सेरिडान की गोली ला कर देती … Read more

एक रिश्ता ऐसा भी – दीपा माथुर

जो पेड़ नई कोपलों का स्वागत नहीं करते वे ठूठ हो जाते है अम्मा ने हसते हुए विभु को कहा। अम्मा का ८४ का बसंत पार हो रहा था। चाहे मुंह में दांत हो ना हो अम्मा हमेशा हर काम जोश से करती थी। हा अब काम की स्पीड में कमी हो गई थी पर … Read more

इस गुनाह की माफी नहीं – परमा दत्त झा

आज सुखिया और दिलभजन मंडल पर पंचायत बैठी थी।गांव के पंच परमेश्वर और सरपंच राम चौधरी,मुखिया जुम्मन शेख सहित लगभग चार सौ लोग उस पीपल पेड़ तले बैठे थे। सरपंच हुजुर,सुखिया को गांव से बाहर निकाला जाय, हुक्का पानी बंद किया जाए -यह कंटीर मिश्रा थे जो सुखिया पर आंख गड़ाए थे। हां हुजूर कंटीर … Read more

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