भाई जैसा मित्र नहीं न भाई जैसा शत्रु – परमा दत्त झा
आज सोहन मंडल अपने भाई रमेश मंडल को सुनाकर कह रहा था “मैं गांव का कुछ भी नहीं दूंगा।पूरी जिंदगी यहीं बरवाद कर दी।यह शहर में घूमता रहा था”। दूसरी ओर रमेश मंडल चुपचाप बड़ा भाई होने के नाते तेरहवीं और बाकी कर्मों को निपटा रहा था।वह बाहर के कमरे में पत्नी के साथ टिका … Read more