स्नेह का बंधन – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

अखिल से मैं जब भी परिवार के बारे में बात करती हूँ वे मुझ पर यह कहकर भड़क जाते थे कि तुम मेरे परिवार को पसंद नहीं करती हो इसलिए उनके बारे में अनाप शनाप बोलकर मेरा दिल तोड़ देना चाहती हो । उनसे मुझे दूर कर देना चाहती हो जो मैं नहीं होने देना … Read more

मायके की तुलना – गीतू महाजन : Moral Stories in Hindi

छोटी बहू की डोली आंगन में आ चुकी थी।नलिनी जी बाकी औरतों के साथ घर के द्वार पर बहू के स्वागत के लिए आ गई थी।प्यार से बहू को घर के अंदर लेकर आई और बाकी सारी रस्में निभाकर वह अब मन ही मन बहुत खुशी और संतोष अनुभव कर रही थी।उन्हें लग रहा था … Read more

सरस्वती का गाँव – एम पी सिंह : Moral Stories in Hindi

सरपंच रामहित का पूरे गांव पर अच्छा खासा प्रभाव था। सरपंच होने के साथ साथ वो बहुत बड़ा जमीदार ओर दयालु इंसान भी था। जरूरत होने पर गांव वालों को कर्जा देकर अपने एहसान तले दबा लेता था। उसकी बात कोई नहीं टाल सकता था, कुछ लोग सम्मान की बजह से तो कुछ अहसानो की … Read more

स्नेह -बंधन – डाॅ संजु झा : Moral Stories in Hindi

कथा नायक सुरेश मिश्रा जिस शादी को बंधन समझते थे,आज उसी  बंधन के स्नेह में  डूबकर अपने भाग्य पर रश्क कर रहे हैं।पत्नी मीता और दोनों बेटे के स्नेह -बंधन में बॅंधकर उन्हें ज़िन्दगी की खुबसूरती का एहसास होता है,इसके लिए सिर झुकाकर बार-बार ईश्वर का नमन करते हैं।एक बात तो सत्य है कि अगर … Read more

वरदान – सिम्मी नाथ : Moral Stories in Hindi

आज   सुहानी के शादी के कार्ड को देखकर विश्वास नहीं हो रहा था , आँखें छलक आईं ,  सुहानी वेड्स अभिलेख …… आख़िर सात वर्ष के बाद सुहानी ने  शादी के लिए हामी भर दी थी ।  सुहानी  का नाम याद आते ही  उसकी पिछली जिंदगी  किसी चलचित्र की  भांति घूमने लगी ।  वो … Read more

दूजबर से स्नेह का बंधन – ‘ऋतु यादव’ : Moral Stories in Hindi

शुभ्रा घर पहुंची तो देखा पति अग्रज टीवी में आँखें गड़ाए थे।टीवी पर ब्रेक आया तो, वहां से नजरें हटाकर, “तो कैसी रही शादी? तुम तो इतनी सजग हो अपनी सेहत को लेकर, कुछ खाया तो होगा नहीं?  शुभ्रा मुस्कुराकर, “जी,पर इसी बहाने पुरानी सहेलियों से मिल ली।” अग्रज, “अच्छा!!ऐसा कौन मिल गया तुम्हें?”  शुभ्रा, … Read more

स्नेह का बंधन – राजेश इसरानी : Moral Stories in Hindi

मै 6 वर्ष का था। पिताजी का एक दुर्घटना में देहांत हो गया था 6 महीने पहले। परिवार में पैसे की कोई कमी नहीं थी। मां एक स्कूल में अध्यापिका थी। उन्हीं की स्कूल में एक मेरे उम्र की छोटी बच्ची पढ़ती थीं। रोज शाम उसे स्कूल से लेने उसके मम्मी पापा दुपहिया लेके आते … Read more

रिश्तों की खिचड़ी – निशा जैन : Moral Stories in Hindi

सुगंधा एक भरे पूरे संयुक्त परिवार में पली बढ़ी खुशमिजाज लड़की थी जो रिश्तों की कीमत भली भांति जानती थी।।उसने अपने हर रिश्ते चाहे वो चाचा हो, बुआ, ताऊ, मौसी, मामा, नाना, नानी, दादा_ दादी हो सबको बहुत पास से देखा और समझा था।        वो चार भाई बहिनों में सबसे छोटी थी और सबकी लाडली … Read more

अनजाना बंधन – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

  मुझे बचा लो,बेटा, ये मुझे क्यो मार रहे हैं?अच्छा लो मैं भी मारूंगी, हाँ-कहते कहते उसने भी एक पत्थर उस भीड़ की ओर उछाल दिया। उसका पत्थर फेंकना था कि बच्चो की भीड़ जिसे उकसाने में बड़ी उम्र के लोग भी शामिल थे, तीतर बितर होने लगी।और इससे उत्साहित हो उसने फिर एक और पत्थर … Read more

ननद भाभी का अनूठा रिश्ता – डॉ कंचन शुक्ला : Moral Stories in Hindi

“रचना तेरे भैया भाभी अभी तक नहीं आए जब तक मायके की चौक (साड़ी सुहाग का सामान  और बेटी की पीली साड़ी) की साड़ी नहीं आएगी तुम क्या पहनकर बिटिया की शादी की पूजा करोगी? मुझे तो लगता है तेरे भैया और भाभी आज आएंगे ही नहीं तेरी चहेती भाभी ने राजीव को मना कर … Read more

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