नाम – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

     दादी ने नितिन को बताया कि तेरे से खेलने के लिये घर में एक छोटी बहन आ गई है, सुनकर वो खुशी-से नाचने लगा।वो दादी से पूछा,” उसका क्या नाम रखेंगे दादी..।” नितिन की जिज्ञासा देखकर दादी मुस्कुरा दी।      छठी के बाद घर के सभी लोग बड़े हाॅल में जमा हुए।बड़े दिनों बाद घर में … Read more

टका सा मुँह लेकर रह जाना – डॉ ऋतु अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

    “क्या मम्मी! भाभी की दो साड़ियाँ ही तो ली हैं मैंने। भाभी को तो शादी में ससुराल और मायके दोनों ही तरफ़ से इतनी साड़ियाँ मिली है। अगर मैं दो-तीन साड़ियाँ ले भी लूँगी तो क्या ही फ़र्क पड़ जाएगा। आखिर यह मेरा मायका है, मेरा हक़ है।” तृषा ने तुनक कर कहा जो कि … Read more

*हरि* – मुकुन्द लाल : Moral Stories in Hindi

   सन्नाटे ने लीला के बढ़ते कदम को रुकने के लिए विवश कर दिया। ज्योंही वह अपनी कोठरी से बाहर निकली सुबह पौ फटते ही वह  कुम्हला उठी । उसने अपनी पैनी दृष्टि इधर-उधर दौड़ाई।अचानक उसकी नजर टकरा गई  छप्पर से लटकते पिंजड़े से उसका दिल धक् से रह गया।पिंजड़ा खाली पड़ा था फांसी पर लटकते … Read more

झिझक – डॉक्टर संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

ऋतु की पक्की सहेली वर्षा का जन्मदिन आनेवाला था,बड़े स्तर पर मनाने वाली थी वो अपना बर्थडे,कार्ड छप चुके थे,निमंत्रण जा चुके थे,वर्षा ने विशेष अनुरोध किया था ऋतु से कि वो एक दिन पहले ही उसके घर आ जाए,उसके साथ तैयारी करने में उसे बहुत मजा आएगा। ऋतु खुशी खुशी सब तैयारी कर रही … Read more

वो रातें – अमित रत्ता : Moral Stories in Hindi

बात उन दिनों की है जब मुझे जंगलात विभाग में फारेस्ट गार्ड की नौकरी मिली। मेरी पोस्टिंग दूसरे जिले में हुई मैं अपनी माँ और बीबी को लेकर बहां शिफ्ट हो गया। कुछ ही दिन हुए थे कि जंगल से खैर के पेड़ काटने की शिकायतें आने लगी काफी कोशिश करने के बाबजूद चोर पकड़ा … Read more

सरप्राइज़ – अपर्णा गर्ग : Moral Stories in Hindi

मुझे अचानक से घर पर देखकर भैया और मां कितने खुश होंगे, मां का हंसता चेहरा, उनकी आंखों की चमक, सोच- सोचकर मीता मन ही मन उत्साहित हो रही थी। जैसे बचपन में चोर पुलिस का खेल खेलते हुए पीछे से धप्पा मारते थे, मैं भी भैया के साथ इस बार ऐसा ही करूंगी। बचपन … Read more

अपनापन – दिक्षा बागदरे : Moral Stories in Hindi

  साक्षी एक पढ़ी-लिखी कुशल गृहिणी थी। उम्र लगभग 42 वर्ष। साक्षी की दिनचर्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था अपने आसपास की महिलाओं से मिलना-जुलना। यह मिलना-जुलना केवल समय व्यतीत करना मात्र नहीं था। इस तरह से मिलने की एक खास वजह थी। साक्षी को अच्छा लगता था किसी के दुख-दर्द सुनना, उनकी कोई समस्या हो … Read more

दिल में प्यार हो तो पराए भी अपने बन जाते हैं – कमलेश आहूजा : Moral Stories in Hindi

हमेशा की तरह सरोज के भाई का इस बार भी राखी का पांच सौ रुपए का मनीऑडर आ गया।ना ही उसने कोई फोन किया,कि दीदी तुम्हारी राखी मिल गई थी ना ही उसकी कोई चिट्ठी आई।सरोज की आँखें फिर से नम हो गईं।माता पिता के जाने के बाद सरोज के छोटे भाई साहिल ने तो … Read more

रिटायरमेंट के साइड इफेक्ट्स ! – उमा महाजन : Moral Stories in Hindi

     सुबह घर में किचन का काम बहुत जोरों-शोरों से चल‌ रहा था। किचन से कोसों दूर रहने वाले सठियाए पति (60+), जिन्होंने कल तक (अपनी युवावस्था में ) कभी बाजार से एक साथ लाई गई सब्जियों को अलग-अलग करके फ्रिज में नहीं रखा था आज गिराते-पटकते सब्जी काट रहे थे।       प्याज काटने की बारी आई … Read more

स्नेह का बंधन – सरोजनी सक्सेना : Moral Stories in Hindi

मैं अलार्म की आवाज सुनकर उठी | घड़ी की ओर देखा 6:00 बजा रही थी | मन कर रहा था कि थोड़ी देर और सो जाऊं | मौसम बड़ा सुहावना हो रहा है | हल्की-हल्की बारिश की बौछार, मंद मंद हवा | मैं अलसाईं सी 5 मिनट के लिए लेट गई | लेटते ही आंख … Read more

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