बहू ने सीमा खींच दी – मधु वशिष्ठ

——————— सर्दियों की दोपहर में ,और गर्मियों की शाम को, गुप्ता आंटी , “कॉलोनी में ”    अपने घर के बाहर चारपाई बिछाकर सबको इकट्ठा करके बहू पुराण शुरू हो जाती थी। उस पुराण में कहीं कुछ भूल जाए तो याद कराने का काम उनके साथ बैठी उनकी बिटिया रानी का था। खाने का काम … Read more

भाई जैसा मित्र नहीं और भाई जैसा शत्रु नहीं दोनों ही देखने को मिल जाएंगे – मंजू ओमर 

भइया आप हमारे घर क्यों आए हैं ,जरूर पैसे मांगने आए होंगे।आप तो हम लोगों को सुकून से रहने ही नहीं देते।जब देखो तब चले आते हैं मुंह उठाकर।हमें नहीं रखना आप लोगों से कोई मतलब आप समझते क्यों नहीं।अरे नेहा मैं तो बस छोटे से मिलने आया था बहुत दिन हो गए थे उससे … Read more

बहु ने सिमा रेखा खिंच दी। – बबीता झा

शांति जब अठारह वर्ष कि हुइ तभी उसकी शादी कर दि गइ।  मायके से वह सबके लिए इज्जत और प्यार का तोहफ़ा लेकर आई। शांति जैसा नाम, बस वैसी ही उसकी पहचान थी। छोटी उम्र में ही ससुराल आने के बाद उसने घर का सब काम अपने ऊपर ले लिया था, यानी कहिए जिम्मेदारी। शांति … Read more

लगावट – लतिका श्रीवास्तव

क्या कह रहा था मंटू इस बार तो छुट्टियों में आ रहा है ना मनोहर जी ने पत्नी जानकी से बहुत उत्सुकता से पूछा जो बेटे मंतव्य उर्फ मंटू से मोबाइल पर बात कर रही थी। आपको तो बस घर कब आ रहा है घर कब आ रहा है का राग छेड़ना आता है।इतनी बड़ी … Read more

मैं आदर्श बहू नहीं बनना चाहती – शिल्पा अग्रवाल

कमरे में एसी की धीमी घड़घड़ाहट और बाहर सन्नाटा पसरा हुआ था। रात के ग्यारह बज रहे थे। बेडसाइड लैंप की मद्धम रोशनी में अनन्या अपनी फाइल बंद कर रही थी जब उसके पति, रोहन ने करवट बदली और थोड़ी हिचकिचाहट के साथ वह बात कही जो शायद वह पिछले दो घंटों से कहने की … Read more

ये कैसे संस्कार दिए हैं बेटी को? – रमा शुक्ला

रविवार की दोपहर थी, लेकिन मिसेज कुसुम के घर का तापमान किसी ज्वालामुखी की तरह उबल रहा था। बाहर हल्की बारिश हो रही थी, जो खिड़कियों के कांच पर एक सुकून भरी थपकी दे रही थी, मगर घर के अंदर का माहौल इसके ठीक विपरीत था। ड्राइंग रूम में टीवी बंद पड़ा था, लेकिन कुसुम … Read more

भरोसा… अब नहीं – अंशुमान सक्सेना 

अमावस की काली रात थी और बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी, लेकिन दिवाकर के मन में जो तूफ़ान चल रहा था, वह बाहर के मौसम से कहीं ज़्यादा भयानक था। वह अपने कमरे में खिड़की के पास खड़ा था, उसके हाथ में एक नीला लिफाफा था जिसे उसने इतनी ज़ोर से भींच रखा था … Read more

ये औरतें भी न, छोटी-छोटी बातों को दिल पर लगा लेती हैं। – डॉ अनुपमा श्रीवास्तव

रात के ग्यारह बज चुके थे। मुंबई की उस गगनचुंबी इमारत के चौदहवें फ्लोर पर बने फ्लैट की बत्तियाँ बुझ चुकी थीं, सिवाय ड्राइंग रूम के एक कोने में जलते लैम्प के। सोफे पर पसरकर ३२ वर्षीय विहान अपने लैपटॉप में सिर गड़ाए हुए था। किचन से बर्तनों के खटकने की हल्की आवाज़ें आ रही … Read more

*बहु ने सीमा खींच दी…* – तोषिका

ओ बहु! जरा इधर तो आ, जल्दी आ इतना धीमे धीमे कहे चलती हो? हमारे जमाने में जब हमारी सास बुलाती थी तो एक सेकंड भी नहीं लगता था आने में। पता नहीं आज कल की पीढ़ी को क्या हो गया है, भागना तो दूर चलना भी नहीं आता है। साक्षी की सास उसको ऐसे … Read more

विधि का विधान – खुशी

आलेख आलेख मुझे छोड़ कर मत जाओ चिल्लाते चिल्लाते रूही नींद से जागी।मां आलेख कहा है क्या वो आज भी नहीं आया।राम जी बोले श्री क्या हुआ कुछ नहीं आज फिर रूही आलेख के नाम से चिल्ला रही है।बात भी तो बड़ी है अपनी रूही कितनी खुश थी आलेख के साथ शादी तय होने पर … Read more

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