अपने लिए जीना भी जरूरी है – मीता राकेश
रात के ग्यारह बज चुके थे। रसोई की सिंक में बर्तनों का एक पहाड़ खड़ा था और डाइनिंग टेबल पर बिखरे हुए जूठे प्लेट इस बात की गवाही दे रहे थे कि आज घर में दावत थी। वंदना ने एक गहरी सांस ली और अपनी कमर पर हाथ रखकर उसे सीधा करने की कोशिश की। … Read more