बड़े भाई हो, बाप मत बनो – डॉ अनुपमा श्रीवास्तव
“माँ! अब और नाटक नहीं होगा। कह दो भैया से कि आज ही हिसाब कर दें। मैं अब इनके टुकड़ों पर पलने वाला नहीं हूँ। मुझे मेरा हिस्सा चाहिए, अभी और इसी वक़्त!” सुमित की आवाज़ से ड्राइंग रूम की खिड़कियाँ थरथरा गईं। उसका चेहरा गुस्से से लाल था और उंगली सीधे अपने बड़े भाई, … Read more