बेजान पड़ा वह पत्थर था – शुभ्रा बैनर्जी : Moral Stories in Hindi
अपनी नौकरी लगने के लगभग एक साल में ही प्रशांत बाबू ने एक घर बनवा लिया था।इसके लिए बैंक से लोन के साथ-साथ बीबी के गहने भी बेचने पड़े उनको। जिले में घर यही सोचकर बनवाया था उन्होंने,कि सारे रिश्तेदार (पत्नी)पास ही हैं। सुख-दुख में काम आएंगे।विडंबना यह रही कि घर बनने के बाद जिसने … Read more