फर्ज़ और फ़रेब के बीच – नंदिनी शर्मा
रसोई में बर्तनों के पटकने की आवाज़ ने सुबह की शांति को भंग कर दिया था। “गजब है! आज घर में सत्संग है, पंडित जी आने वाले हैं, और बहु महारानी कुर्सी पर बैठकर पूड़ियाँ बेल रही हैं? हे भगवान! अब तो रसोई भी अपवित्र हो गई। हमारे ज़माने में तो पैर टूटने पर भी … Read more