कागज़ के फूल – करुणा मलिक
“रिया बेटा, तूने लाखों खर्च किए, तेरा बहुत-बहुत आशीर्वाद। पर तू शायद भूल गई कि इस ‘पुराने तंग घर’ की हर ईंट में मेरी और तेरी माँ की जवानी, तुम्हारा बचपन और हमारे सुख-दुःख की गूंज बसी है। पेंटहाउस में एसी की ठंडक तो होगी, पर इन दीवारों जैसी गर्माहट नहीं होगी। तूने वो दिया … Read more