तमाशा – अमिता कुचया
“अपने घर का धुआं जब दूसरों को दिखाओगे, तो लोग आग बुझाने नहीं, हाथ सेकने आएंगे… क्योंकि टूटे हुए मकान की ईंटें लोग अक्सर उठा ले जाते हैं।” — “तुम्हें लगता है कि मैं इस घर की मालकिन हूँ?” अंजलि ने आखिरकार चुप्पी तोड़ी, आवाज़ में कड़वाहट थी। “नहीं सुमित, मैं तो बस एक सजावटी … Read more