“तमाशा और मरहम” – सीमा श्रीवास्तव

:** जिस मोहल्ले की वाह-वाही लूटने के लिए आप अपने घर की इज्जत नीलाम कर रहे हैं, याद रखियेगा, बुढ़ापे में प्यास लगने पर पानी का गिलास वो मोहल्ला नहीं, वही ‘बुरी’ बहू लेकर आएगी। क्या दूसरों की सहानुभूति पाने की लत एक सास को इतना अंधा कर सकती है कि उसे अपनी बहू का … Read more

“बंद मुट्ठी की लाज” – आरती देवी

** क्या अपनी बहू की बुराई करके एक सास अपना मन हल्का करती है, या अपने ही घर की नींव में बारूद भर रही होती है? पढ़िए, कैसे एक सास की जुबान ने उसकी अपनी ही बेटी की खुशियों में आग लगा दी। समीर गुस्से में चिल्लाया, “माँ! मैंने अनिका को हजार बार कहा था … Read more

“वो खामोश मालकिन” – वर्षा मंडल

“सूट-बूट पहनकर बोर्ड मीटिंग में फैसले लेना ही सिर्फ़ आज़ादी नहीं होती, कभी-कभी घर की चारदीवारी में रहकर अपनी शर्तों पर दुनिया चलाना उससे भी बड़ी ताक़त होती है। पढ़िए एक ऐसी कहानी जो नारीवाद (Feminism) की आपकी परिभाषा बदल देगी।” “तुम लोग समझती हो कि साड़ी पहनने वाली, धीमी आवाज़ में बात करने वाली … Read more

**वह परायी माँ**

**”नजर का इलाज डॉक्टर कर सकता है, लेकिन नजरिए का इलाज तो वक्त की ठोकर ही करती है। जब हम किसी को नफरत के चश्मे से देखते हैं, तो उसकी हर अच्छाई भी हमें साजिश नजर आती है।”** — आर्यन की आँखों से आंसुओं का सैलाब फूट पड़ा। उसका गला रुंध गया। उसे अपनी हर … Read more

फरेब – रीमा साहू

सुमित्रा देवी की आँखों से पश्चाताप के आँसू बह निकले। उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ। जिस बेटे को उन्होंने ‘नकारा’ और ‘पत्थर’ समझा था, असल में वही उनकी नींव का पत्थर था। और जिस दामाद को उन्होंने ‘हीरा’ समझा था, वह केवल कांच का टुकड़ा निकला जो वक्त आने पर चुभ गया। कहानी का … Read more

दूरदर्शन वाला प्यार – ऋतु गुप्ता 

कन्नू ओ कन्नु कहां जा रहा है मायके आई सुषमा ने अपने बेटे कनिष्क को आवाज लगाते हुए पूछा तो कन्नु बोल क्या मां यहां नानी के घर भी आपकी पहरेदारी चलती रहेगी क्या ? गर्मियों की छुट्टियां हैं और यहां लाइट भी कितनी कम आती है कैसे मन लगेगा? मैं बस पड़ोस वाली तन्वी … Read more

रिश्ते – खुशी

निलेश एक आदर्श बेटा था।जिसके परिवार में मां मीना पिताजी राजेश एक बहन पूनम और भाई राहुल थे।निलेश अपने पूरे परिवार में श्रवण कुमार के नाम से प्रसिद्ध था। मां का लाडला ।मां बाप की बात सुनने और मानने वाला कभी उनके सामने जबान नहीं खोली। सब कहते मामा बॉय है ये हर बात में … Read more

वेलेंटाइन डे – बीना शुक्ला अवस्थी

आज ” वेलेन्टाइन डे” है। हमेशा की तरह इस बार भी प्राची का मन 14 फरवरी आते आते अवश होने लगा है। वह लाख प्रयत्न करे परन्तु शाम होते होते कोई अनजान डोर उसे अपनी ओर खींचने लगती है। वर्ष भर किये सारे वादे, सारे प्रयत्न रेत के महल की तरह धराशाई होने लगते हैं। … Read more

सुखद एहसास – गीता वाधवानी

 पहला प्यार, यह एक ऐसा सुखद एहसास है जो दिल को खुशी से भर देता है। दिल को गुदगुदाता है और ना चाहते हुए भी चेहरे पर मुस्कान आ जाती है फिर भले ही पहला प्यार जिससे हुआ था, वह जीवन में मिला हो या ना मिला हो।   पहला प्यार एक खुबसूरत एहसास, जिसे प्यार … Read more

विधी का विधान कभी नहीं टलता – मंजू ओमर 

मांजी ओ मांजी लो खाना खा लो ।कमला के जोर से आवाज देने पर सुनैना जी की तन्द्रा टूटी ।अरे हां कमला क्या हुआ क्यों आवाज दे रही है । कहां खोई हुई है आप सुन ही नहीं रही है अब से आवाज दे रही हूं। खाना लाई हूं आपके लिए ,अरे रख दे अभी … Read more

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