निरादर – के आर अमित
गाँव का नाम था मथेहड़ चारों ओर हरियाली, तालाबों के किनारे झूमती सरसों और दूर-दूर तक फैले मक्की के खेत। इस साल तो जैसे धरती माँ ने दिल खोलकर वरदान दिया था। खेतों में इतनी मक्की लहलहा रही थी कि सुनहरी बालियाँ सूरज की रोशनी में चमकतीं और पूरे गाँव को अपनी महक से भर … Read more