अपनों की पहचान – मधु वशिष्ठ : Moral stories in hindi
—————- मैं अपने ही घर में हूं और यहां सब मेरे अपने ही हैं परन्तु मां को ख्याल क्यों नहीं आ रहा कि वह कह क्या रहीं है? मैं 30 साल की होने को आई हूं, परंतु वह कह रही हैं कि शीतल जो कि। मुझसे 4 साल छोटी है, क्यों ना उसका विवाह कर … Read more
अपनों की पहचान – अंजु गुप्ता ‘अक्षरा’ : Moral stories in hindi
बाहर बारिश ऐसे बरस रही थी जैसे आसमान भी किसी अदृश्य पीड़ा से रो रहा हो। बिजली की चमक, गड़गड़ाहट और भीगे शहर की निस्तब्धता के बीच डॉक्टर आरव ICU की चौथी मंज़िल पर खड़ा था। लोगों की जान बचाने वाले वही हाथ आज खुद अपने मन की जद्दोजहद से जूझ रहे थे। बचपन से … Read more
काव्या – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral Stories in Hindi
******** ” बधाई हो काव्या, तुम मॉ बनने वाली हो।” इतना सुनते ही विगत स्मृतियां उसके मस्तिष्क में शोर मचाने लगीं। उसे आज भी वह दिन याद था जब डॉक्टर वेदांत की कार से टकराकर वह अचेत हो गई थी। डॉक्टर वेदांत और रुद्रांगी अपने मित्र के विवाह समारोह से वापस लौट रहे थे। डॉक्टर … Read more
मर्यादा की लकीर – परमा दत्त झा : Moral stories in hindi
शांति देवी अपने कमरे में चुपचाप बैठी थीं। खिड़की से आती हल्की हवा में उनके कागज़ हिल रहे थे। वह अपनी आठवीं कहानी लिख रही थीं। लिखना उनका शौक भी था और जीवन का सहारा भी। पति के निधन के बाद उन्हें सरकारी पेंशन मिलती थी और कभी-कभी उनकी कहानियाँ पत्रिकाओं में छपती थीं, तो … Read more
माँ की घर वापसी -परमा दत्त झा : Moral stories in hindi
भोपाल की उस दोपहर धूप कुछ तेज़ थी। पड़ोसन वर्मा आंटी ने जैसे ही देखा कि रानी मिश्रा गली के मोड़ से रिक्शे में बैठकर आ रही हैं, तो वह हैरान रह गईं।“अरे, रानी जी! इतनी जल्दी? कहकर गई थीं कि पूरी गर्मी दिल्ली में ही रहेंगी, अब चार दिन में ही लौट आईं? सब … Read more
आप अपने बेटे के साथ क्यों नहीं रहते – सुधा जैन : Moral stories in hindi
“अरे यह क्या दिन भर सास बहू वाली कहानियां पढ़ती रहती हो, दूसरा कुछ पढ़ा करो “ पतिदेव ने अपनी पत्नी से कहा, तब पत्नी मुस्कुरा कर बोली ” यह इतनी जगत व्यापी, सर्वव्यापी समस्या है कि न वर्तमान में ,न भूत मे न भविष्य में इस समस्या का हल नजर आता है ….करें भी … Read more
लौट आओ – बालेश्वर गुप्ता : Moral stories in hindi
उस दिन भी मैं जब शाम को सोसाइटी के पार्क में गया तो व्हील चेयर पर उन बुजुर्ग व्यक्ति को शून्य में निहारते पाया,प्रतिदिन मैं उन्हें वही ऐसे ही देखता आ रहा था।चेहरा देखते ही लगता था, वे असीम पीड़ा झेल रहे हैं।वैसे तो आजकल पश्चिम सभ्यता अपनाने के कारण कोई किसी से कोई मतलब … Read more
” सुसाइड नोट “- डॉ. सुनील शर्मा : Moral stories in hindi
न जाने क्यों, अब जीने की इच्छा ही नहीं रही. बूढ़े शरीर में दिमाग़ भी अब सुस्त हो गया है. आंखों की रोशनी और जीभ का स्वाद तो कब का चला गया.पेट में कुछ पचता नहीं. दांत भी एक एक कर साथ छोड़ गए. नहीं नहीं, कुछ बीमारी नहीं. बस थकान रहती है, चलने सा … Read more