सेर पर सवा सेर – लतिका पल्लवी :  Moral Stories in Hindi

माँ आज रात के खाने में क्या बनाऊ? जो तुम्हारा मन करे वह बना लो बहू।इतनी छोटी बात के लिए मुझसे क्या पूछना है।ठीक है माँ तो आलू पराठा और प्याज़ का रायता बना ले रही हूँ। ठीक है माँ जी? जाती हूँ तैयारी करने, आलू कुकर में उबलने को रख देती हूँ। फिर चाय … Read more

बड़ी बहू – डाॅ उर्मिला सिन्हा :  Moral Stories in Hindi

सूरज की ऊंचाइयों में तृप्ति का आनंद है तो नियति के गहन टेढ़ी-मेढ़ी कंदराओं में भटकते भी देर नहीं लगती।समय बड़ा बलवान… परिस्थितियां एक सी नहीं रहती।    माही इस घर की बड़ी बहू बनकर आई थी। भरा-पूरा संयुक्त परिवार था। दादा-दादी, चाचा-चाची, बुआ फुफा उनके बाल-बच्चे और खुद के दो छोटी ननदें और एक देवर। … Read more

प्राईवेसी भी जरूरी है – विमला गुगलानी :  Moral Stories in Hindi

       सुरूचि की शादी तय हो चुकी थी,वैसे तो  एंकाश से उसकी अरैंज मैरिज थी, लेकिन शादी से पहले वो तीन चार बार मिलकर आपस में कई बातें कर चुके थे। दोनों की उम्र ही परिपक्व ,तीस से ऊपर थी, एक दूसरे के परिवार के बारे में , उनकी पंसद, नापंसद को अच्छे से जानने की … Read more

इंतजार की ठंडी रात -ज्योति आहूजा :  Moral Stories in Hindi

कुछ लोगों की आदत होती है मस्करी करने की, किसी पर व्यंग्य कसने की, झूठ मूठ की बातें करने की और मज़ाक उड़ाने की। ऐसा ही एक परिवार था, जिसमें साठ बरस की औरत जानकी देवी अपने बेटे आनंद , बहू सुनीता और पोते–पोती के साथ रहती थी। उनके पूरे घर का यही मिज़ाज था—बात … Read more

प्यार और तुमसे – अर्चना सिंह :  Moral Stories in Hindi

धनाभाव में पली – बढ़ी हुई थी मैं , लेकिन ईश्वर ने रूप देने में भी कटौती कर दी थी । एक तो रंग साँवला, हाइट कम और नाक भी चपटी । पर पढ़ने में अच्छी थी शायद इस वजह से भी लोग मुझसे दोस्ती करते थे । जिस दिन ग्रेजुएशन का आखिरी पेपर था … Read more

भेदभाव-मनीषा सिंह

जिद नहीं करते बहू! चलो घर चले••!  नहीं पिताजी! हम लोगों की उस घर में कोई कदर नहीं और जहां इज्जत नहीं वहां जाने से क्या फायदा•••? कहते शीतल की आंखों में आंसू आ गए।   “मुझे अपनी गलती का एहसास हो चुका है” तभी तुम लोगों को वापस लेने के लिए आई हूं! चलो घर … Read more

 मुँह में ज़बान – विभा गुप्ता

   ” ये क्या बहू, तूने मिसेज़ पंडवानी को मना क्यों नहीं कर दिया।जब देखो कटोरा लेकर कभी चीनी तो कभी दही माँगने चली आती है।चार बार तो मेरे सामने ही आ चुकी है..पीछे में तो…।” निर्मला जी अपनी बात पूरी कर पाती, उससे पहले ही रजनी बोल पड़ी,” जाने दीजिये ना मम्मी, पड़ोसी ही तो … Read more

मोह मायके का – रश्मि प्रकाश 

“ क्या बात है बहू कब से तुम्हें आवाज़ दे रही हूँ तुम सुन ही नहीं रही हो और अब देखो यहाँ बैठकर ना जाने किन ख़्यालों में खोई हुई हो… क्या बात है परेशान लग रही हो?” सुनंदा जी अपनी बहू अवनी से बोली  “ मम्मी जी आपको तो पता ही है मायके में … Read more

बेटी का घर बसने दो भाभी – मंजू ओमर 

हेलो अंकिता क्या कर रही हो बेटा क्या करूंगी मम्मी, खाने की तैयारी कर रही हूं। अभी अभी तो ऑफिस से आई होगी थोड़ा आराम कर ले बेटा खाने में लग गई। नहीं तो बाहर से कुछ आर्डर कर ले। अरे नहीं मम्मी बुढ़िया  को घर की दाल रोटी खानी है ।और रोज-रोज  बाहर का … Read more

गऊ – गीता वाधवानी

” देवकी के पापा, मुझे तो देवकी की बहुत चिंता हो रही है,विवाह तो कर दिया हमने उसका, परंतु इतनी सीधी लड़की ससुराल में कैसे रहेगी,ना जाने इतनी सीधी गाए जैसी लड़की, आज के कलयुग में कैसे पैदा हो गई, इसे तो सतयुग में पैदा होना चाहिए था,ना मुंह में जुबान और ना हाथों को … Read more

error: Content is protected !!