अहसास – सरिता गर्ग
कैसा खूबसूरत था वह दिन जब धरती का चाँद अपनी धड़कनें समेटे मेरे आँगन में उतरा था , मगर मेरा दुर्भाग्य मुझसे दस कदम आगे चल रहा था। मैं नहीं जानता था सुख के मुट्ठी भर पल ही मेरे हिस्से में आने हैं। तुम मुझे छोड़ कर चली गईं। लाल साड़ी में लिपटा तुम्हारा निष्प्राण … Read more