कर्म पीछा नहीं छोड़ते
एक सेठ जी ने अपने मैनेजर को जरा सी बात पर इतना डांटा— कि मैनेजर को बहुत गुस्सा आया , पर सेठ जी को कुछ बोल ना सका–| वह अपना गुस्सा किस पर निकाले– वो गया सीधा अपने कंपनी स्टाफ के पास और सारा गुस्सा कर्मचारियों पर निकाल दिया। अब कर्मचारी किस पर अपना गुस्सा … Read more
रखा बहार आई —- डा.मधु आंधीवाल
——————– आज तो लगता है इन्द्र देवता ने पूरा पानी का टैंकर ही आसमान में खाली कर दिया है। रोनित खिड़की से बाहर का नजारा देख कर खुशी से चीखा पायल देखो ना क्या मस्त बारिश है। पायल पास आकर बोली रोनित शहर में ये नजारा कहां देखने को मिलता था । रोनित एक सिविल … Read more
सच्चाई का आईना – गुरविंदर टुटेजा
अप्रकाशित संजना आज शाम को तैयार रहना..डॉ० अभिमन्यु के हॉस्पिटल का उदघाट्न है…नीरज ने आफिस के लिये निकलते हुये बोला…!!!! संजना शाम को समय से तैयार हो गयी थी…नीरज आया और दोनो निकल गयें…रास्तें में बात करते हुये नीरज ने बताया बहुत बड़े मंत्री आ रहें है उदघाट्न करने के लिये…!!!! दोनों पहुँच गयें थे…अभिमन्यु … Read more
” रक्षाबंधन” – गोमती सिंह
——सुबह के 8:00 बज रहे थे पावन महीना सावन फिर पूर्णमासी का दिन था मां सुबह 6:00 बजे भोर से ही उठ कर नहा धोकर अपने बच्चों के लिए खीर पूरी बना रही थी दोनों लड़कियां भी उठकर नहा धोकर तंग तैयार हो गई थी। अपने दोनों छोटे छोटे भाइयों को बड़े प्यार से … Read more
बहन की राखी – पूजा अरोड़ा
“इस बार सुषमा बहन की राखी नहीं आई। ईश्वर करे सब ठीक-ठाक हो।” बिस्तर पर पड़े हुए सुखदेव बोला। उम्र कोई अस्सी साल । कमजोर शरीर। जर्जर काया मानो बुढ़ापे का एक-एक दिन बस काट रहे हो.. “दादा जी! क्या हो गया जो आपकी बहन सुषमा की राखी नहीं आई । आपको तो उनसे मिले … Read more
खिला खिला मन – लतिका श्रीवास्तव
.सभी को खाना खिलाने के बाद सुमी अपने लिए भी थाली लगा रही थी….ये उसका रोज का नियम था सबको गरम गरम खाना खिलाने के बाद ही वो खुद खाना खाती थी ….. वर्षों से यही नियम चला आ रहा था …पर आज अचानक उसे अपना मन कुछ बुझा बुझा सा प्रतीत हो रहा था…जाने … Read more
स्कूटी से पहली लौंग ड्राइव!! – मनीषा भरतीया
रमन 15 दिन पहले से बहुत आनंदित था क्योंकि वह पहली बार स्कूटी से लॉन्ग ड्राइव करने वाला था अपनी पत्नी रीना के साथ करीब 60 किलोमीटर अप और 60 किलोमीटर डाउन की यात्रा थी वह स्कूटी से टाकी जाना जाता था. उसकी पत्नी रीना ने उसे बहुत समझाया रमन तुम मान जाओ हम गाड़ी … Read more
राखी की सही हकदार – आरती झा”आद्या”
दिल्ली से सटा छोटे से गाँव में दो हजार एक की 13 जुलाई की सुबह बीस साल की स्नेहा अपने कमरे से निकल रेलिंग पकड़े नीचे आँगन में बैठे माता पिता को देख रही थी। दो साल पहले की हो तो बात है, उसके चौबीस साल के उम्र के भाई शिवम ने आर्मी जॉइन किया … Read more
*मैं हूँ ना* – सरला मेहता
कमर पर लटका मोबाइल निकाल नम्बर घुमाकर बोली, ” हाँ भाभी ! मैं दो दिन काम पर नहीं आऊँगी, थोड़ा आराम करुँगी। यह है सुमन ताई, कद्दावर कद काठी की। तीखे नयन नक्श व मेहनत की घाम से पका ताम्बई रंग। चारित्रिक से ताँबे में भी सोने की झलक सी है। अँगूठाटेक है किंतु फोन … Read more