डर पर जीत – लतिका श्रीवास्तव

आज भी ट्रेन लेट होती जा रही थी…..पानी पीने के लिए बॉटल निकाली ही थी कि हाथ से छूटकर गिर गई उठाने के लिए झुकी ही थी कि किसी ने बॉटल देते हुए …..प्रणाम मैम”…. कहते हुए पैर छू लिए तो शमिता चकित हो गई!कौन है ?का स्वाभाविक प्रश्न उसकी आंखों में पढ़ते हुए सामने … Read more

मेरी बेटियां,मेरा अभिमान,मेरा गुरूर – सुषमा यादव

 #बेटी हमारा स्वाभिमान  ,,मेरी सभी कहानियां हकीकत बयां करती हैं,, इसलिए मैं असली नाम और स्थान लिखने से  परहेज़ करतीं हूं,,पर एक बहुत बड़े साहित्य मंच की प्रसिद्ध लेखिका ने लिखा,, आप की सभी कहानियां सच्चाई लिए हुए बहुत ही बेहतरीन रहतीं हैं,, आप बहुत अच्छा लिखती हैं, परंतु यदि आप अपनी कहानियों में किरदारों … Read more

पुनर्मिलन – तृप्ति शर्मा

#बेटी_हमारा_स्वाभिमान आज उसे अनमना सा देख रोहित ने पूछा तो उसने कह तो दिया कुछ नही पर क्या सच मे कुछ नही था। जीवन की भेंट की हुई बहुत सी उथल पुथल के बावजूद बचपन, जवानी के बाद आज उस पड़ाव पर खड़ी थी जहां उसके पास सब कुछ था पर अकेलेपन का डर भी … Read more

वहम – डॉ उर्मिला सिन्हा : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi  :  कहते हैं वहम का इलाज हकीम सुलेमान के पास भी नहीं है और सुरेखा तो साधारण मानवी है। पहिरावा, दिखावा से भले ही वह शिक्षित,आधुनिका दिखाई देती है, परंतु बाल्यावस्था से मन में कुछ मनोवैज्ञानिक गुत्थियां अवश्य पाले हुई है।    सुबह जल्दी में थी। गृहिणियों का प्रातकाल वैसे भी बड़ा … Read more

प्रतिज्ञा – तरन्नुम तन्हा

चार दिन बाद घर लौटी तो बीमार माँ की सेवा में लगी फुलटाइम मेड-नर्स, नीना, ने बताया कि माँ बस जूस और सूप ले रही हैं; दलिया तो देखती भी नहीं। “उनकी पसंद का कुछ और बना लेती न!” “बच्चे की तरह जिद पर हैं कि सुहानी के हाथ से ही खाऊँगी,” नीना बहुत होपलैस … Read more

रिश्ता बराबरी का होना चाहिये -प्रीति गुप्ता

दीपाली एक मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की है। माता पिता के अलावा एक छोटा भाई है। पिता की छोटी सी सरकारी नौकरी में दोनो बच्चो कि परवरिश अच्छी हो रही थी। देखते देखते समय निकल गया दीपाली ने खूब पढ़ाई करके मेडिकल कॉलेज में एडमिशन ले लिया। अपनी पढ़ाई के साथ एक हॉस्पिटल में पार्ट टाइम … Read more

भीगे पल – विजया  डालमिया

बरसते भीगते मौसम के साथ शिल्पा का मन भी आज ना जाने क्यों भीगता चले जा रहा था। यूँ तो उसने कभी भी मौसम के बदलाव से अपने आप में कोई फर्क कभी नहीं महसूस किया। जिम्मेदारियों को बखूबी निभाते निभाते कितने ही मौसम यूँ ही गुजर गए उसे पता ही नहीं चला। उसकी जिंदगी … Read more

टैग – पुष्पा कुमारी पुष्प

“मम्मी जी के लिए यह साड़ी कैसी रहेगी?..आप जरा देखकर बताइए।” मॉल से कपड़े खरीदती रागिनी ने अपनी सास के लिए एक साड़ी पसंद कर अपने पति राजीव की ओर बढ़ा दिया। “मांँ को हल्के रंग की साड़ी पसंद आती है!.उन्हें गाढ़ा रंग पसंद नहीं।” यह कहते हुए राजीव ने रागिनी को अपनी तरफ से … Read more

वो दबी मुड़ी रोटियां – नीरजा कृष्णा

आज उनके घर में कुछ मित्र रात्रिभोज के लिए आ रहे थे…सब तरह की तैयारियां की गई… रागिनी को इतना भागते दौड़ते देख कर पापा जी का मन भीग सा गया,”अरे बिटिया, तुम बहुत थक जाओगी… हर चीज़ घर में  कहाँ तक बनाओगी… रूमाली रोटी…बटर नान और स्टफ्ड कुलचे बाहर से आ जाऐंगे… सब्जियां तुमलोग … Read more

हमारी छोरी,छोरे से कम ना है – डॉ पारुल अग्रवाल

#बेटी_हमारा_स्वाभिमान कहते है बेटी पराई होती है, पता नहीं किसने ये रीत बनायी। क्या बेटी के पैदा होने में कम समय लगता है या दर्द नहीं होता खैर ये तो हमारे समाज की संकीर्ण सोच है पर मेरे को लगता है कि जब हम हर बात पर आधुनिकता का ढिंढोरा पीटते हैं तो इस बात … Read more

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