नकटौरा – सुनीता मिश्रा

बारात प्रस्थान कर चुकी थी ,अब घर में औरतें ही थीं। लगातार दो दिनों से विवाह की रस्मों में उलझी,तकरीबन सभी औरतों के चेहरे पर थकान की शिकन स्पष्ट थी। कुछ औरतें मंडप में बिछी जाजमों  पर पसर गईं,कुछ दोने में मोतोचूर के लड्डू और नमकीन सेव ले मंडप के पास बैठकर टूंगने लगीं ।बच्चें … Read more

अंतिम इच्छा एक सत्य कथा – गुंजन आनंद गोगिया

शाम से ही अनीता का मन बहुत द्रवित था।आज उसकी छोटी बेटी का चोला संस्कार था, जिस पर पड़ोस की सारी औरतों ने आकर उसको बातों ही बातों में बेटा ना होने का सुनाया और बधाई भी दी। इन बातों ने उसके मन को बहुत विचलित कर दिया कि अब उसकी सास और ननद उसको … Read more

पीहर की सौगात* – किरण केशरे

पिताजी को गुजरे दो माह हो गए थे, माँ तो बचपन में ही गुजर गई थी ,शारदा की , उनके जाने के बाद पहली राखी थी । शारदा पीहर अपने दो बच्चों के साथ आई थी, घर का माहौल थोड़ा बोझिल था। दोनों भाई और भाभी रस्मी तौर पर सामान्य ही बरताव कर रहे थे। … Read more

कहाँ लिखा है की बेटियां सहारा नहीं बनती – संगीता अग्रवाल

कल की चिंता मे तुम आज का सुकून खो रही हो पायल..साथ ही रिश्ते भी….. अभी हमारे बेटे की उम्र ही क्या है… कल जब वो बड़ा होगा तब तक उसके लिए भी इंतज़ाम हो जायेंगे अभी भाई साहब की बेटियों की पढ़ाई उनके सपने ज्यादा जरूरी है..! मुदित ने अपनी पत्नी पायल को समझाते … Read more

बगिया की चिरैया – मणि शर्मा

“मम्मी !कहाँ हो तुम ?”आवाज़ लगाती मेघना बैठक में घुसी. आज मेघना स्कूल से जल्दी छूट गई थी. उसका मायका शहर में ही था, कभी कभी वह स्कूल से सीधा ही मम्मी पापा का हाल चाल लेने आ जाती थी. “दीदी! आइए बैठिए!” छोटे भाई आकाश की पत्नी सुमि ने मेघना के हाथ से सामान … Read more

तिरछी मुस्कान – मणि शर्मा

सुमि और आकाश के इकलौते बेटे वंश की बहुत सुंदर तस्वीर बैठक में लगी थी .सुमि चुपचाप तस्वीर निहार रही थी . वंश की तिरछी मुस्कान उसका मन घायल कर रही थी . वह मानने को तैयार ही नहीं हो रही थी कि उसका प्यारा बेटा इस दुनिया से सदा के लिये जा चुका है … Read more

सुरक्षित – विजय शर्मा 

आइये आइये रागिनीजी ! बहुत दिनो बाद चक्कर लगा हैं इस बार । वृद्धाश्रम की संचालिका जोशी मैडम ने उनका स्वागत करते हुए कहा । रागिनी गुमसुम सी चुपचाप कुर्सी पर मुंह लटकाए बैठ गई । जोशी मेम समझ गई जरूर कुछ गड़बड़ है । हर बार तो वे आते ही प्रसन्न मुद्रा मै हाथ … Read more

वातावरण – गीतांजलि गुप्ता

स्टाफ़ रूम में घुसते ही देखा मिसेज़ शर्मा गुस्साई सी खड़ी हैं। देखते ही नमस्ते तो करी परंतु बड़े ही तीखे तेवर से। ज़बाब देते समय थोड़ा मुस्कुराने का प्रयत्न किया। “कैसी हो आप मिसेज़ शर्मा। कोई काम है?” मैंनें पूछा शनिवार को तो पैरेंट्स टीचर मीट हुई है तब तक तो सब ठीक था … Read more

गुरूजी – अनुज सारस्वत

“चल चिकने(अमित)ये पीछे क्लास की खिड़की दूसरे मोहल्ले में खुलती है,इंटरवल में तू अपना और मेरा बैग नीचे फेंक दियो,मैं पीछे पहुंच जाऊंगा,और बैग उठा लूंगा फिर तू आराम से खाली हाथ बाहर आ जइयो और चलेंगे सिनेमा “राजा बाबू” लगी है पायल टाकीज में वहाँ मुंशी (अशोक) टिकट ले कर तैयार होगा” सौरभ ने … Read more

आधुनिक युग – प्रीती सक्सेना 

कॉलेज का आखिरी दिन, एमबीए, कंप्लीट हुआ, पढ़ाई खत्म, पूरी तरह से फ्री, सब खुशी से चहचहा, से रहे थे, हम पांच सहेलियों का प्लेसमेंट, मुंबई की अलग अलग कम्पनी में हुआ था, वहां भी मिलने की खुशी थी, दिन भर खूब मस्ती करके, घर पहुंची, मम्मी पापा, खुश भी थे, और मेरे जाने से … Read more

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