नकटौरा – सुनीता मिश्रा
बारात प्रस्थान कर चुकी थी ,अब घर में औरतें ही थीं। लगातार दो दिनों से विवाह की रस्मों में उलझी,तकरीबन सभी औरतों के चेहरे पर थकान की शिकन स्पष्ट थी। कुछ औरतें मंडप में बिछी जाजमों पर पसर गईं,कुछ दोने में मोतोचूर के लड्डू और नमकीन सेव ले मंडप के पास बैठकर टूंगने लगीं ।बच्चें … Read more