पुनर्प्रतिष्ठा – दीप्ति मित्तल

बच्चों को स्कूल बस में बैठाकर वापस आ शालू खिन्न मन से टैरेस पर जाकर बैठ गई. सुहावना मौसम, हल्के बादल और पक्षियों का मधुर गान कुछ भी उसके मन को वह सुकून नहीं दे पा रहे थे, जो वो अपने पिछले शहर के घर में छोड़ आई थी. शालू की इधर-उधर दौड़ती सरसरी नज़रें … Read more

“ईर्ष्या बनी औजार” –   सीमा वर्मा

अंधेरी रात। साढ़े आठ के करीब बिहार प्रांत के किसी शहर के पास किसी कस्बे में जहाँ शाम में ही रात का सन्नाटा पसर जाता है। आवाज आ रही है एक सफेद रंग से पुते चार कमरों वाले घर से। घर की दो बहुएँ हैं हीरा और नीरा जो आपस में सगी बहनें भी हैं। … Read more

 बारिश ने बना दी बात – ऋतु अग्रवाल

   आयुषी कल से बहुत परेशान है। जबसे मम्मी ने बताया है कि कल लड़के वाले उसे देखने आ रहे हैं तब से वह मन ही मन ना जाने क्या-क्या तिकड़में लगा रही है पर मम्मी भी उससे एक कदम आगे हैं। मतलब वह डाल डाल तो मम्मी पात पात।     अब आप सोचेंगे कि आयुष इतनी … Read more

बरसात की रोटी – डॉ.अनुपमा श्रीवास्तवा

पिछले साल से ज्यादा इस साल बारिश अपना विकृत रूप दिखा रही है। रात-दिन बिना रुके बारिश हो रही है। जिंदगी बिलकुल ही अस्त व्यस्त होकर रह गई है। चारो तरफ पानी ही पानी ।   अमीरों के लिए यह मौसम सुखद और खुशनुमा होगा। लोग घर में बैठकर पकौड़े के साथ बारिश का आनंद लेते … Read more

आखिरी पन्ना – पुष्पा पाण्डेय : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi  : पारुल बचपन से ही शिक्षण के क्षेत्र  में जाना चाहती थी। वह हमेशा शिक्षक बनने की इच्छा व्यक्त करती थी। स्नात्तर की परीक्षा के बाद उसका दोस्त प्रतीक उसे प्रशासनिक  प्रतियोगिता की तैयारी करने की सलाह दे रहा था, लेकिन पारुल अपना सपना पूरा करना चाहती थी। प्रतीक प्रशासनिक प्रतियोगिता … Read more

मेरी क्या गलती है – अनुपमा : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi  : बाहर बहुत तेज बारिश हो रही थी , लगता है तूफान आएगा , एक तूफान तो हर वक्त सुमी के भीतर भी चलता रहता है और उसका न कोई वक्त है ना मौसम , बारिश लगातार तेज हुई जा रही है और सुमी की नज़रे बाहर ही लगी है , … Read more

प्यार को प्यार ही रहने दो–कोई नाम ना दो – कुमुद मोहन

सुधा के पति मनीष के गुजर जाने के बाद उनका बेटा समर और बहू लीना अपने साथ लंदन ले आए। उसे बहुत याद आता अपना खुला-खुला घर,छोटा सा बगीचा पुरानी काम वाली संतो उसके बच्चे जो दादी-दादी कहते हर वक्त टाॅफी-चाकलेट और बिस्कुट के लालच में उसके आसपास मंडराते रहते थे,उसका छोटा मोटा काम खुशी-खुशी … Read more

मुझे फ़र्क पड़ता है – बेला पुनीवाला

  मेरा नाम ख़ुशी, अपने घर में सब के होठों की मुस्कान, सब के दिलो की जान। मम्मी और पापा ने मेरा नाम बड़े प्यार से रखा था, ” ख़ुशी “। जिसके जीवन में हर पल खुशियांँ ही महकती  रहे और वह सब के जीवन को ख़ुशियों से भर दे। घर में, मैं  सब की प्यारी … Read more

अपने और पराये का एहसास – पूजा अरोरा

संडे का दिन था सब सुबह देर तक सोए हुए थे।  तभी अचानक से दरवाजे की बेल बजी।  ममता जी  ने  दरवाज़ा खोला तो देखा दरवाजे पर उसकी  बेटी  मोहिनी खड़ी थी|  हाथ में सूटकेस और दोनों बच्चों के साथ,   इतने में मोहिनी के पापा विनोद जी   की आवाज़ आयी, “ममता जी  कौन आया … Read more

दीदू माँ और तीज – तृप्ति शर्मा

छोटा सा परिवार था पलक का। मां पापा और एक बडी़ बहन। इत्तू सा परिवार पर प्यार ढेर सारा, बडी़ बहन काजल पलक से छह साल बडी थी , बहुत रोब दिखाती थी बड़ा होने का । पर पलक भी शैतानियों से भरी, अल्हड़ सी उसके हिस्से का थोड़ा भी प्यार बड़की दीदू को न … Read more

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