ट्रेन की यात्रा – सीमा नेहरू दुबे

गनीमत है ज़िंदगी पूरी ना सही पर थोड़ी तौं लाइन पर आ रही है और ट्रेन का सफर उसी नोर्मल ज़िंदगी के सफर का हिस्सा है। मुझको भी बड़े दिनों बाद ट्रेन का सफर नसीब हुआ, वाह! क्या कहने!  मुझे तौ सच मे ये सफर बहुत सुहाना लगता है आप बैठे है और बाहर देखो … Read more

वो खौफनाक रात – कमलेश राणा

25 दिसंबर की वो खौफनाक रात जब भी याद आती है,,रोंगटे खड़े हो जाते हैं,,   उस दिन बड़े बेटे की बर्थडे थी,,सभी लोग बड़े खुश,,तय हुआ कि डिनर ग्वालियर में होटल में करके,,45 किलोमीटर दूर अपने गृहनगर लौट जायेंगे,,   डिनर 11बजे समाप्त हुआ ,,,पूरा परिवार साथ था,,दोनों बेटे,बहू,उसके दो बच्चे,हम पति-पत्नी और एक … Read more

 ‘ बरसात की वो रात..’ – विभा गुप्ता

 साक्षी ने रिपोर्टिंग का सारा सामान अपने हैंडबैग में रखा और कोर्ट जाने के लिए जैसे ही वह ऑटो में बैठी कि झमाझम पानी बरसने लगा। “ओफ्फ़ो,इस बारिश को भी अभी ही आनी थी, आज ‘ कमली केस ‘का फ़ैसला होना है, देर हुई तो पूरी रिपोर्ट देवकी तैयार कर लेगी और मेरा प्रमोशन फिर … Read more

सावन की पहली बारिश – डॉ पारुल अग्रवाल

बाहर बादल बहुत तेज़ गरज रहे थे, मूसलाधार बारिश हो रही थी। सर्दी की बारिश वैसे भी सबको घर के अंदर रहने को मजबूर कर देती है। दामिनी जी बड़ी सी हवेली में आग के सामने  आरामकुर्सी पर  बैठ अपने बीते दिनों को याद कर रही थी। एक समय कैसे ये हवेली हंसी और ठहाको … Read more

प्रचलन – गीतांजलि गुप्ता

गृह प्रवेश के बाद माँ ने बिंद्रा को आराम करने बैठक में बैठा दिया। दादा दादी की इच्छा थी कि वो अपने पोते की शादी गांव में करें और पिता जी ने उनकी बात मान भी ली। अमन अपनी शादी धूम धाम से बड़े होटल में करना चाहता था। बिंद्रा के पिता भी ये ही … Read more

बरसात की वो रात – संगीता अग्रवाल

” निखिल अब हम घर चलते है आप देवर जी का ध्यान रखियेगा सुबह ऑपरेशन से पहले मैं आ जाउंगी !” नीलम उठते हुए पति से बोली। ” नीलम इतनी रात को तुम दोनों वापिस कैसे जाओगी बारिश के कारण कुछ ज्यादा ही सन्नाटा है और दुबारा कभी भी बारिश आ सकती है !” निखिल … Read more

वो खौफनाक रात  ( डरावनी कहानी) – पूजा मनोज अग्रवाल

पिछले हफ्ते के दार्जिलिंग ट्रिप की वजह से मिताली को ऑफिस में ओवरटाइम करना था । काम की अधिकता से आज फिर वह ऑफिस से घर निकलने के लिए लेट हो गई थी । उसने जल्दी से अपना काम निपटा कर अपना बैग उठाया और छाता लेकर बाहर की तरफ आ गई । मौसम विभाग … Read more

एक बरसात- पश्चाताप वाली – तृप्ति शर्मा

काली घटा देखकर रूचि तेज रफ्तार से सीढ़ियां चढ़कर छत तक पहुंची बहुत से कपड़े धो डाले थे उसने आज। सावन का महीना था ना ,तो बादल और रिमझिम को तो मजा आता ही है लुका छुप्पी खेलने में, अक्सर रुचि को बहुत लुभाती थी यह लुका छुप्पी । क्यों ना भाए उसका पसंदीदा महीना … Read more

 सावन की झड़ी – प्रीति आनंद अस्थाना

  “लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है….”    “वाह दीदी! आज तो मौसम के साथ-साथ आपका मूड भी मस्त हो रहा है। कित्ता अच्छा गाते हो आप!” निधि का गाना सुन मीरा बोल उठी।   “हाँ, तभी तू बर्तन बजा-बजा के इतना मधुर संगीत दे रही थी!”   “क्यों मज़ाक़ उड़ा रहे हो … Read more

 सावन की झड़ी  – गीता वाधवानी

चारों और काले काले बादल। तेज बरसती सावन की झड़ी, ठंडी ठंडी मदमस्त हवाएं। मौसम तो बहुत सुहावना था, पर बरसात में भीग कर आए हुए ओम प्रकाश जी को किसी की याद दिला कर रुला रहा था।         उन्होंने अपने कपड़े बदले, गीले कपड़े रस्सी पर डालें और तौलिए से सिर पोंछते हुए अपनी स्वर्गवासी … Read more

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