संस्कारों की असली परीक्षा – आरती झा
“सुमित्रा, आज मेरे सामने से हट जाओ। आज या तो इस घर में मेरे उसूल रहेंगे या फिर यह कल का छोकरा, जिसे मैंने अपनी उंगली पकड़कर दुनिया दिखाई है।” दीवार पर टंगी घड़ी की टिक-टिक के बीच हरीशंकर जी की गरजती हुई आवाज़ ने घर के सन्नाटे को चीर दिया। उनका चेहरा गुस्से से … Read more