वो सोलह बरस की – नीरजा कृष्णा

वो बच्चों के पास अहमदाबाद आई हुई थी…आयुष ने दिन रात एक कर दिया था,”आपको आना पड़ेगा… बहुत दिन हो गए हैं।”बहुत सोच कर वो दस दिन के लिए आ गई थीं। सुबह सुबह वो गुनगुनाते हुए सबकी चाय बना रही थीं…मैं सोलह बरस की…तू सत्रह बरस का…तभी पीछे से जोरदार धमाका हुआ…हैपी बर्थडे दादी…वो … Read more

 रिश्ता – निभा राजीव

नीता सोफे पर बैठी टीवी देख रही थी। अचानक हाथ पर किसी का स्पर्श पाकर उसने मुड़कर देखा। उसकी ननद की 3 वर्षीय मूक बेटी रिया वहां बैठी थी, जिसे उसके पति ऋषि ननद की लम्बी बीमारी से मृत्यु के बाद अपने साथ ले आए थे। वह बोल नहीं सकती थी और उसका इलाज चल … Read more

स्वयं की तलाश – डा मधु आंधीवाल

पंखुरी खिड़की में खड़ी थी । आज घनघोर बारिश हो रही थी ।  उसके साथ ही उसके मन में भी  अंधेरी घटायें घिरी थी । सोच रही ऐसी ही तो बारिश की शाम थी । वह बस का इन्तजार कर रही थी । आज प्रेक्टीकल क्लास देर से छूटी । वह अकेली रह गयी उसकी … Read more

“नहीं भूलेगी बरसात की वो रात” – कविता भड़ाना

बारिश को भी अभी आज ही आना था, सोचते हुए सिया ने अपना बैग पैक किया और सभी बच्चों को विदा करके ” ट्यूशन इंस्टिट्यूशन “से बाहर निकली, तब तक बरसात बहुत तेज होने लगी। सिया एक मध्यम वर्गीय परिवार की तीन भाई बहनों में सबसे छोटी बेटी है,जिसने अभी-अभी m.Ed की परीक्षा पास की … Read more

मैं माफी मांग लूँगी – रिंकी श्रीवास्तव

मिनी की शादी को एक साल हुआ था| उसके ससुराल मे सास ससुर ,जेठ जेठानी उनके दो बच्चे मिनी और उसके पति रमन थे|     मिनी आज अपने पति रमन के साथ अस्पताल गयीथी,उसकी एच एस जी जांच होनी थी,वही कराने के लिए वे दोनो अस्पताल गये थे| वहां काफी भीड़ थी , करीब एक घंटे  … Read more

मायके का पहला सिंधारा – कुमुद मोहन

बहूजी! कोई कमी ना होनी चाहिए,बेटी का पहला सिंधारा जा रहा है,हम जानती हैं तुम हर चीज में हाथ खींच कर चलती हो,भगवान के वास्ते आज अपनी कंजूसी ना दिखाना” दादी की कड़कती आवाज सुन नीरा का मुँह उतर गया! दो महीने पहले ही नीरा और अशोक की बेटी सुमा का ब्याह सुधीर से हुआ … Read more

कोई मेरे दिल से पूछे –  कुमुद मोहन

सुधा-सुधा कहां हो भई!तुम्हें पता है मुझे वाॅक से आते ही अखबार चाहिए। तुमसे ये भी नहीं होता कि अखबार वाला डाल गया है तो उठाकर ही रख दो। किचन में चाय चढ़ाकर सुधा ब्रश कर ही रही थी कि रमन दनदनाता हुआ चिल्लाता हुआ घर में घुसा! सुधा का मन तो हुआ कि तड़ाक … Read more

कॉलर ट्यून – डॉ अनुभूति दवे

आज की सुबह कुछ अलग है। सरला जी अपने बिस्तर पर लेटी हुई हैं। सरला जी जो सुबह सुबह ही राजधानी एक्सप्रेस की तरह काम में लग जाती हैं, आज बिस्तर पर निढाल है। इनका स्वभाव अपने नाम की तरह ही बिलकुल सरल और सीधा है। वे अपने समय से कहीं आगे हैं एवं समाज … Read more

इत्फ़ाक से बारिश में हुई मुलाकात की एक रात – बेला पुनीवाला

एक रात बारीश की और साथ में, मैं और वह।  हालात हुए थे कुछ ऐसे, कि हम दोनों के बिच उस रात जो भी हुआ, उसे ना वह रोक सकता था और नाहीं मैं, जो हम दोनों ने कभी सोचा नहीं था, कि एक रात ज़िंदगी में ऐसी भी होगी। उस एक रात में जैसे … Read more

चिडि़यों की टोली – कहानी-देवेंद्र कुमार

चिडि़यों की टोली उतरती है दोपहर में दो बजे। स्कूल बस ग्लोरी अपार्टमेंट्स के सामने रुकती है। सबसे पहले रजत की आवाज गूंजती है, ‘‘दादी, हम आ गए।’’ हम यानी ग्लोरी अपार्टमेंट्स के फ्लैटों में रहने वाले बच्चे भले ही अलग-अलग हैं, पर दादी सबकी एक हैं। उन्होंने ही बच्चों को नाम दिया है-चिडि़यों की … Read more

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