वो सोलह बरस की – नीरजा कृष्णा
वो बच्चों के पास अहमदाबाद आई हुई थी…आयुष ने दिन रात एक कर दिया था,”आपको आना पड़ेगा… बहुत दिन हो गए हैं।”बहुत सोच कर वो दस दिन के लिए आ गई थीं। सुबह सुबह वो गुनगुनाते हुए सबकी चाय बना रही थीं…मैं सोलह बरस की…तू सत्रह बरस का…तभी पीछे से जोरदार धमाका हुआ…हैपी बर्थडे दादी…वो … Read more