झूठे दिखावे से जिंदगी नहीं चलती है – रेखा सक्सेना : Moral Stories in Hindi

रितिका बड़े उद्योगपति की बेटी थी। उसका जीवन महँगी कारों, आलीशान घर और शानदार पार्टियों से भरा था। कॉलेज में उसकी मुलाकात ऋषि से हुई, जो एक साधारण परिवार का ईमानदार और संस्कारी युवक था। ऋषि की सादगी ने रितिका का दिल जीत लिया। धीरे-धीरे दोस्ती प्रेम में बदली और एक दिन रितिका ने अपने … Read more

आत्मसम्मान –

“मम्मी जी, मैं जा रही हूँ इनके साथ। अब मुझे मत बुलाइएगा। यहाँ मेरी इज्ज़त नहीं, वहाँ मैं नहीं रहूँगी। फिर चाहे वह मेरा ससुराल ही क्यों न हो। मुझे मेरा आत्मसम्मान प्यारा है। और बड़े पापा जी ने जब मुझे घर से निकलने को कहा, तब आपने और पापा जी ने कुछ भी नहीं … Read more

बदलती ऋतु – प्रतिमा श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

गर्मियां जा रहीं थीं और सर्द हवाओं ने लोगों को राहत दिया था। हल्की-हल्की फुहार मन के किसी कोने में दबे जज़्बातों को कुरेदने को बेकरार थी। आरुषि चाय की प्याली लेकर बरमादे में जमीन पर ही बैठ गई थी।आज उसके अतीत ने उसे झकझोर दिया था। मृदुल की यादों ने उसे एक पल भी … Read more

आंखें नीची होना – गीता अस्थाना : Moral Stories in Hindi

नमिता जी को रिटायर हुए करीब एक साल हो रहा था। वे एक इण्टरमीडिएट स्कूल में सीनियर अध्यापिका के पद से रिटायर हुईं थीं। बड़ी कुशलता से उन्होंने अपना अध्यापन कार्य समाप्त किया था। उनके पढ़ाने का तरीका इतना रोचक होता था कि बच्चे उन्हीं से हिंदी विषय पढ़ना चाहते थे। कुछ अध्यापक भी अपने … Read more

झूंठा दिखावा – सुनीता माथुर : Moral Stories in Hindi

मीनल जब भी अपनी सहेली राखी के घर जाती राखी मीनल को नया- नया सामान बड़े चाव से दिखती देखा आज—– मैंने नया बेड खरीदा, पुराना टीवी वेंच दिया, नया टीवी बड़ा वाला खरीद लिया! कई बार तो राखी मीनल से कहती है—-अरे तुम्हारे पास तो साड़ी भी नहीं है—- देखो मैं 5000 की 10,000 … Read more

अपनों की पहचान विपत्ति में ही होती है – हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

सुमित बेटा… तू किसी भी तरह से जल्दी आजा… बहु को दर्द शुरू हो गए हैं तुझे तो पता है तेरे पापा को गाड़ी चलाना भी नहीं आता घर में गाड़ी होते हुई भी अपाहिज सी हो गई हूं, कैसे अस्पताल लेकर जाऊं दिमाग सुन्न हो गया है, उधर बहू दर्द के मारे चिल्ला रही … Read more

अकेलापन – रीटा मक्कड़  : Moral Stories in Hindi

“मम्मी जी ये लो आपकी चाय…” नीलू ने चाय की ट्रे हाथ मे पकड़े हुए जैसे ही सासु माँ के कमरे में अन्दर आने लगी तो देखा मम्मी जी अखबार हाथ मे पकड़े गुमसुम सी किसी और ही दुनिया मे खोई थी।उन्हें जैसे नीलू के आने का अहसास ही नही हुआ।जबकि रोज़ तो वो पहले … Read more

गृह प्रवेश

सोफे पर बैग पटकते हुए मीना धम्म से बैठ गई।सर भी भारी लग रहा था। इतने में मम्मी (पूनम जी) भी पानी लेकर आ गईं। “क्या हुआ मीना बेटा, बड़ी थकी-थकी सी लग रही हो। तबीयत तो ठीक है ना?” “हाँ, बस थोड़ा सर भारी है… ज़रा अपने हाथों से दबा दो ना।” कहते हुए … Read more

“कौन अपना, कौन पराया”

गिरीजा देवी का चेहरा उस दिन कुछ खास चमक रहा था। वजह थी – उनके सबसे बड़े बेटे नरेश की सरकारी नौकरी से रिटायरमेंट पार्टी।पार्टी बड़े होटल में रखी गई थी, पूरा परिवार सजधज कर पहुँचा था। गिरीजा देवी का छोटा बेटा महेश, उसकी पत्नी दीपा, और बेटी  प्रिया – सब व्यस्त थे मेहमानों को … Read more

दिखावे का सच – विजय लक्ष्मी : Moral Stories in Hindi

बरसों पुरानी हवेली का चौड़ा आँगन सुबह की धूप से नहा रहा था। तुलसी चौरे से आती सुगंध और रसोई से छनती बर्तनों की आवाज़ घर को जीवंत बना रही थी। यह था श्री धर प्रसाद जी का घर—गाँव का सम्मानित और सम्पन्न परिवार, जिसे लोग जमींदार जी कहकर पुकारते थे। श्री धर जी के … Read more

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