परिवर्तित स्वरूप – कंचन शुक्ला

सोलह साल, कक्षा नौ की छात्रा लवलीन को, कमरे में रोता देख मम्मी ने, तुरंत वहाँ जाना उचित नही समझा। जैसे ही सिसकियों का सिलसिला कुछ देर में धीमा हुआ, नॉक कर वह अंदर दाखिल हुईं। सहसा उन्हें वहाँ देख, लवलीन सतर्क हो गयी। विषय के मद्देनजर, किसी सकारात्मक वार्तालाप की आशा नही थी, उसे। … Read more

ख़्वाबों की तामील – कंचन शुक्ला

कोपल हमेशा अपने रंगीन ख्वाबों की तामील में डूबी रहती। शादी के आठ महीने बाद भी, कपिल में अपने पसंदीदा बॉलीवुड अभिनेता की छवि तलाश रही है। पतिदेव कपिल पता नही शर्माते थे, या उनके सब शौक पूरे हो चुके थे। इन सब बातों से वे अनछुए, अनभिज्ञ थे। काल्पनिकता और अव्यवहारिकता, उन्हें बिल्कुल नही … Read more

ननद भौजाई – दीप्ति सिंह

छवि और सुहानी का याराना आठवीं कक्षा से शुरू हुआ । जहाँ छवि को सरोज अग्रवाल कड़क कक्षा अध्यापिका के रूप में मिली। यही सरोज अग्रवाल सुहानी की माँ थीं घर में एक बड़ा भाई प्रतीक था  । पिता तो अब इस दुनिया नही थे। छवि ,प्रतीक को सुहानी की तरह ‘भईया ‘ नही कह … Read more

विदेश – डॉ. नीतू भूषण तातेड

पड़ोस वाली मंजुला को बताते हुए कलिका चहकती हुए कह रही थी,”मेरा रोहन बड़ा होकर विदेश ही जाएगा ।क्या रखा है देश में? वहाँ देखो! सब कुछ साफ सुथरा ,बड़ी और चमकीली गाड़ियाँ, सुंदर-सुंदर इमारतें और भरपूर पैसा।” अपनी  बेटे रोहन के मन में बचपन से एक ही बात घर कर दी गई थी कि … Read more

लड़का लड़की दोस्त भी हो सकते है – संगीता अग्रवाल 

दोस्ती खून के रिश्तो से अलग ऐसा रिश्ता जिसमे कोई स्वार्थ नही होता। दोस्ती तो बूढ़े बच्चे मे , अमीर गरीब मे या लड़का लड़की मे भी हो सकती है।  एक सच्चा और प्यारा दोस्त है कई रिश्तो के बराबर है …आइये आपको एक प्यारी सी दोस्ती की कहानी सुनाते है। ” क्या रितेश मैं … Read more

अनोखी दोस्ती – निभा राजीव “निर्वी” : Moral stories in hindi

सतीश जी इस कार्यालय में वित्तीय विभाग में कार्यरत थे। उस दिन वह कार्यालय से बाहर निकले तो कार्यालय के बगीचे का माली रामप्रसाद आंखों में आंसू लिए बैठा दिखाई दिया। सतीश जी उसके पास पहुंचे और सहानुभूतिपूर्वक उससे पूछा “- क्या हुआ रामप्रसाद ? इतने परेशान क्यों दिखाई दे रहे हो?”.….. रामप्रसाद अचानक से … Read more

 भगवान से एक दोस्त की शिकायत  – मंजू तिवारी

 मैं अपनी दोस्त से बहुत प्यार करती हूं। शायद अपने आप से भी ज्यादा फिर भी मैं यह कहना चाहूंगी उसके प्रेम के सामने मेरा प्रेम वोना नजर आता है। जब मैं उसके साथ नहीं होती थी तुम मुझे बड़ी बेचैनी सी होती थी जैसे मेरे शरीर में आत्मा ही नहीं है। शायद उसको भी … Read more

कुछ ख़्वाब जो बने हकीकत – डॉ.नीतू भूषण तातेड

 मेरा एक ख़्वाब था कि लोग मुझे डॉ नीतू के नाम से जाने जो अब पूरा  हो चुका है….. बात लगभग आज से 35-36 वर्ष पहले की है जब मैं छठी कक्षा में पढ़ती थी ।पढ़ने में मेरी बिल्कुल भी रुचि नहीं थी। माँ-पिता की सबसे छोटी संतान होने के नाते अधिक प्यार ने मुझे … Read more

स्वयंसिद्धा – कमलेश राणा 

मिनी के पापा दिल्ली में एक प्राईवेट कंपनी में जॉब करते हैं,,मिनी से बड़ी बहन निधि और छोटा भाई विजय है,,   मिनी के पापा ने बेटे और बेटी में कभी भेद नहीं किया,,बेटियों को भी पूर्ण शिक्षित किया ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें किसी का मुंह न देखना पड़े और वो स्वाबलंबी बन सकें,, … Read more

हासिल आयी शून्य – श्रद्धा निगम

————————–  आज फिर मालती ने अपनी आदत से मजबूर होकर फोन पर हंसते हुए सामने वाले से कहा -अरे आओ,मज़ा आ जाएगा।सब मिल कर धमाल करेगे और ऐसा करना साथ मे शिखा  और मणि को भी ले आना।बहुत दिनों से कोई पार्टी नही हुई।हंसते हुए मालती ने फोन रखा ही था कि राहुल ने टोकते … Read more

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