मम्मी के सपने .. –   रंजू  भाटिया 

उफ्फ्फ्फ़ !!!”पापा जी इसको इस वक्त यह राजकुमारी की कहानी मत सुनाओ !! इसके दिमाग में फ़िर यही घूमता रहेगा ,इतनी मुश्किल से अभी इसको परीक्षा के लिए याद करवाया है ..आप यह पेपर लो इस में इसके जी .के कुछ सवाल हैं खेलते खेलते इसको वही रिवीजन करवाओ !! “”पेपर अपने ससुर को दे … Read more

तमन्ना – शिखा कौशिक

कितने रंग है दुनिया में लेकिन तुम तो बस अँधेरे में खो जाना चाहती हो जिसमे केवल काला रंग है .मै तुम्हारे दुःख को जानती हूँ लेकिन इस तरह जीवन को बर्बाद करना तुम्हारी जैसी गुनी लड़की को शोभा देता है क्या ?  तमन्ना अपने को संभालो !आज पुनीत से अलग हुए तुम्हे पूरे 6माह … Read more

बचपना – शिखा कौशिक 

एक वर्ष हो गया सुभावना के विवाह को ,मेरी पक्की सहेली . बचपन से दोनों साथ -साथ स्कूल जाते ,हँसते ,खेलते पढ़ते .कभी मेरे नंबर ज्यादा आते कभी उसके लेकिन दोनों को एक दूसरे के नंबर ज्यादा आने पर बहुत ख़ुशी होती .एक बार मैं तबियत ख़राब होने के कारण स्कूल नहीं जा पाई तब … Read more

मक्खनबड़े – नीरजा कृष्णा

माधवी की मायके जाकर होली खेलने की अतीव इच्छा इस साल पूरी हुई। पाँच सालों के बाद वो सपरिवार आगरा पहुँची थी। इतने लंबे सफ़र की थकान के बाद सुबह आँखें खुलीं तो रसोईघर से आती खटर पटर की आवाज से चौंक गई… अरे इतनी सुबह कौन हैं। दीवार घड़ी पर निगाह पड़ी तो अभी … Read more

बड़ी बहन – नीरजा कृष्णा

हर साल गर्मी की छुट्टियों में माँ के घर दोनों बहनें कुछ दिनों के लिए मिलती थीं। बड़ी बहन सीमा ज़रा बड़े घर की बहु थी और ठसके वाली थी, इसके विपरीत छोटी सविता साधारण हैसियत वाली थी। सीमा छुटकी और उसके बच्चों के लिए बहुत बढ़िया कपड़े और ढ़ेरों दूसरे सामान लाती थी। कल … Read more

आंतरप्रेन्योर – कंचन शुक्ला

शोभा अपनी माँ से- अम्मा!! कलेक्टर साहब और परधान का जलवा देखी हो। कितने लोग उनकी गाड़ी के आगे पीछे चलते हैं। सर!! सर!! कहते नही थकते। उनके एक आदेश पर, हैया दैय्या करके दौड़ते हैं। हमको भी ऐसा ही कुछ बनना है। अम्मा सोभा से- आज हम सप्तमी का व्रत किये हैं, तेरे लिए। … Read more

दोस्ती – पुष्पा पाण्डेय 

पत्नी की पुण्य तिथि पर जानकीदास जी वृद्धाश्रम में भोजन कराने गये थे। अचानक उनकी नजर एक जगह आकर ठिठक गई।  “कहीं आप रामाशीष तो नहीं हैं?” अपना नाम सुनते ही रामाशीष जी नजरें उठाकर देखे और आँखे नम हो गयीं।  “तुम यहाँ?” “हाँ, तुम्हारी बात नहीं मानने की यह सजा है।” दोनों दोस्त गले … Read more

अंतर्वेदना – सरिता गर्ग ‘सरि’

    बिस्तर पर पड़ी सिलवटें  उसके मन की सिलवट बन गईं। रात भर की थकन उदासी,और शिथिलता ओढ़े , मन में हवा के टूटे पंखों की छटपटाहट लिए बेजान पैरों से चलती वो , हवा में  रात का ठहरा हुआ जहर पीती सूर्योदय से पूर्व ही सागर-तट पर चली आई। दूर समुद्री पक्षी लगातार चीख रहे … Read more

एक थी सिद्धि – सीमा वर्णिका

आज आँसू थमने का नाम ही नहीं ले रहे ..अश्रुओं की अविरल धारा ने अतीत पर जमी धूल को हटाकर जैसे  अनावृत कर दिया हो । सब कुछ चलचित्र भांति आँखों के समक्ष घूम रहा है। वह मेरी मित्र थी..या कोई रूहानी  सम्बन्ध था उससे ..आज तक मन समझ न पाया । ‘सिद्धि ‘-हाँ यही … Read more

अहसास – सरिता गर्ग

  कैसा खूबसूरत था वह दिन जब धरती का चाँद अपनी धड़कनें समेटे मेरे आँगन में उतरा था , मगर मेरा दुर्भाग्य मुझसे दस कदम आगे चल रहा था। मैं नहीं जानता था सुख के मुट्ठी भर पल ही  मेरे हिस्से में आने हैं।                  तुम मुझे छोड़ कर चली गईं। लाल साड़ी में लिपटा तुम्हारा निष्प्राण … Read more

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