आंखें नीची करना – सीमा सिंघी : Moral Stories in Hindi

  मैं आज सुबह से ही अपने पन्द्रह वर्षीय बेटे साकेत को समझाने में लगी थी! देखो साकेत तुम अपने हर जन्मदिन पर बेवजह ही बेमतलब की चीजों की  फरमाइश करते रहते हो ! हम तुम्हें जितना भी दे दे ! तुम खुश नहीं होते हो । मगर क्या उन बेसहारा बच्चों के बारे में कभी … Read more

असली सुन्दरता – डॉ कंचन शुक्ला : Moral Stories in Hindi

आज फिर घर में सुबह से ही अफ़रा-तफ़री मची हुई थीं घर की साफ-सफाई पर्दे सोफे के कवर सब बदले जा रहे थे रसोई में नाश्ते खाने की तैयारियों में स्नेहा की मां और बड़ी बहन लगी हुई थीं। यह सब देखकर स्नेहा मन-ही-मन दुखी हो रही थी उसके मन की उदासी उसके चेहरे पर … Read more

दिखावटी जिंदगी – लतिका पल्लवी : Moral Stories in Hindi

अमित, सुनो ऑफिस जाने के पहले मुझे हज़ार रुपए देकर जाना,निभा नें अमित से रोटी बनाते हुए रसोई घर से कहा। हजार रुपए क्या करोगी,महीना का आखरी सप्ताह है,पैसे कहाँ है इतने मेरे पास?अमित के इतना कहते ही निभा रोटी बनाना छोड़कर ड्राइंग हॉल मे आकर बोलने लगी। मेरे लिए तुम्हारे पास पैसे रहते ही … Read more

ईमानदारी ही धन है – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

        मालती का पति एक फ़ैक्ट्री में फोरमैन था।वो अपने पति और बेटे के साथ किराये के छोटे-से घर में बहुत खुश थी।उसके आसपास के घरों में भी फ़ैक्ट्री के ही वर्कर्स के परिवार रहते थें लेकिन उनका आर्थिक स्तर मालती से बहुत अच्छा था।उनके ठाठ-बाट देखकर उसका दस साल का मनु हमेशा उससे प्रश्न करता,” … Read more

झूठे दिखावे से जिंदगी नहीं चलती – आर. एस. कुमार : Moral Stories in Hindi

लंदन की चकाचौंध का बखान करते हुए जब बबलू हर शाम हाथ में दारू की गिलास लेकर बगल में बैठे अपने बहनोई को गरियाता है , उसकी बड़ी बहन खून के आंसू रोती है। अपने बहन बहनोई को भारत के गांव से लेकर आया बबलू डिंग हांकने में कोई कमी नहीं करता है। जबकि सच्चाई … Read more

हमारी ही जिम्मेदारी हैं सास – प्रतिमा श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

दीदी हमलोग बाहर जा रहें हैं, नहीं तो रख लेते अम्मा को। ये बात नई नहीं थी प्रीति के लिए उसकी देवरानी भाविका का हमेशा एक बहाना तैयार रहता था। प्रीति की सास उसके साथ ही रहतीं थीं लेकिन कभी भी जरूरत पड़ने पर सोचती की सासू मां को कुछ दिनों के लिए देवरानी के … Read more

जायदाद

निशा काम निपटा कर बैठी ही थी कि फोन की घंटी बजने लगी। मेरठ से विमला चाची का फोन था ,”बिटिया अपने बाबू जी को आकर ले जाओ यहां से। बीमार रहने लगे है , बहुत कमजोर हो गए हैं। हम भी कोई जवान तो हो नहीं रहें है,अब उनका करना बहुत मुश्किल होता जा … Read more

“अम्मा का कमरा”

रीना किचन में बर्तन समेट ही रही थी कि अचानक फोन की घंटी बजी।फोन उठाया तो गाँव से बड़े चाचा थे— “बिटिया, अम्मा अब बहुत बूढ़ी हो गई हैं। आँखों से कम दिखता है, घुटनों में दर्द है। अब अकेले रहना मुश्किल हो गया है। तुम लोग दिल्ली में हो, किसी के पास तो होना … Read more

माँ बिना पीहर नहीं, सासू बिना ससुराल नहीं

घर के आँगन में रौनक थी। आज सुषमा की ननद, किरण अपने मायके आई थी। पूरे दो साल बाद उसकी यह मायके यात्रा हुई थी। जैसे ही वह घर में दाखिल हुई, सुषमा दौड़कर उससे लिपट गई। “आइए दीदी, बहुत दिनों से आप नहीं आईं। हम सब आपको बहुत याद कर रहे थे। शायद पूरे … Read more

झूठे दिखावे से जिन्दगी नहीं चलती – अर्चना खण्डेलवाल

सुना है तेरी देवरानी ने नई कार ले ली है? और मिठाई भी नहीं खिलाई, सुलोचना ने पड़ोसन रजनी को कुरेदने की कोशिश की। रजनी ने  हंसी हंसते हुए हामी भरी, मिठाई तू  मेरी देवरानी से मांग आखिर तू उसकी भी तो पड़ोसन है। ये सुनते ही सुलोचना झेंप गई क्योंकि रजनी और उसकी देवरानी … Read more

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