“श्रृंगार या सौभागय” – भावना ठाकर ‘भावु’

रुचि जो एक कार्पोरेट जगत में मल्टीनेशनल कंपनी में सीईओ की पोजीशन पर नौकरी कर रही थी, उसकी शादी एक पढ़े लिखे रईश खानदान के लड़के आकाश से हुई। एक महीना शादी के बाद की रस्मों में और हनीमून में चला गया, छुट्टियाँ भी ख़त्म हुई, सब अपने अपने काम पर लग गए। रुचि भी … Read more

सिपाही के पिता का दर्द” – भावना ठाकर’भावु’

वतन पर कुर्बान होने वाले तनय मेरे है ज़िंदाबाद तू, सरहद की सीमाओं को सदियों तक रहेगा याद तू, नाज़ है वतन को तुझ पर है माँ भारत की प्यारी औलाद तू। मैं उस औलाद का पिता हूँ जिसने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने आप को कुर्बान कर दिया, सीने पर गोली खाकर दुश्मनों … Read more

सागर से मुझको मिलना नहीं है – नम्रता सरन”सोना

गंगा एक गांव की भोली भाली बेहद ही खूबसूरत लड़की…उसकी मासूम सुंदरता को वैसे तो शब्दों में ढालना बहुत ही मुश्किल है.. ये समझ लीजिए कि गंगा को देखकर ऐसा प्रतीत होता था मानो जैसे खेतों की हरियाली उसी पर छाई हुई है.. चलती तो यूं लगता फूलों का गुलदस्ता चहलकदमी कर रहा है… हँसती … Read more

पापा आप लोगों को बस पैसा दिखताअपने बच्चों की खुशी नही- संगीता अग्रवाल

राहुल  के पापा विनोद जी ने अपने बेटे राहुल से कहा बेटा राहुल आज 1 सप्ताह हो गया तुम ऑफिस नहीं जा रहे हो क्या बात है कोई तकलीफ है तो हमें बताओ पहले तो तुमने कहा कि तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है इसलिए ऑफिस नहीं जा रहे हो अब तो बिल्कुल ठीक हो फिर … Read more

चिट्ठी तेरे नाम की – सरिता गर्ग ‘सरि’

आज की शाम कितनी बोझिल है। गहरे सन्नाटे को चीरते, तमन्नाओं के बादल बरसने को तैयार हैं। यादों की छतरी ओढ़े ,इन बादलों से बचता और दर्द का पुल पार करता मैं दूर निकल जाता हूँ। दुख है तो बस यही कि मैं तुम्हें खुश न रख पाया और हार गया।  कभी-कभी तुम नाजायज जिद … Read more

असलियत – लखविंद्र सिंह संधू

मैंने जैसे ही आफिस की पार्किंग में कार पारक की । हररोज की तरह मेरा सेवादार सामने मेरा बेैग पकड़ने के लिए खड़ा था ।  “सर आपसे कोई मिलने आया है” बैग पकड़ते ही उसने कहा । मैं जल्दी से अपने ऑफिस में पहुंचा तो सामने मेरा दोस्त गुरबक्श और उसकी बेटी रिम्पी खड़े थे … Read more

“कर्मो का फल”  – कविता भड़ाना

रीमा आज बहुत खुश है। सुबह से ही तैयारियों में लगी हुई है। तरह तरह के पकवानों की खुशबू से पूरा रसोई घर महक रहा है, नए परदे, बेडशीट, पायदान और फूलदानों में रखे हुए ताजे फूल,…. पूजाघर से आती भीनी भीनी धूपबती की महक से पूरे घर का वातावरण बहुत खुशनुमा हो रहा है।…. … Read more

मनिया! – सारिका चौरसिया

गरमागरम पुरियों की भीनी भीनी खुशबू से उसके मुंह मे पानी आ रहा था। इधर कड़ाही से पूरियां उतरती उधर वह दौड़ दौड़ सबकी प्लेटों में परोसने चली जाती। जब तक वह दूसरी खेप ले कर पहुंचती तब तक पहली ख़ेप की पूरियाँ प्लेटों से गायब दिखती। भूख उसे भी लगी थी,उसने तो सुबह से … Read more

मर्म – नम्रता सरन”सोना

चारों देवरानी जेठानियों मे खुसुर पुसुर हो रही थी। “दीदी, बिल तो अच्छा तगड़ा बना होगा” रीत ने कहा। “हाँ भई, अब इतने बड़े हॉस्पिटल में  इलाज हो  तो बिल तो बनना ही है” गोमती ने कहा। “हाँ, वही तो, मैं तो इनसे कह भी रही थी कि आजकल तो पैसे वालों को ही बीमार … Read more

दावत और दादी मां – डा. मधु आंधीवाल

आज शहर के जाने माने उद्योग पति मि.नरेश खन्ना का बंगला ” आशियाना ” की सजावट एक अनोखी भव्यता दे रही थी । मि.खन्ना और उनकी पत्नी चारूलता दोनों ही एक गर्वीला व्यक्तित्व था इस शहर में । चारूलता जिस कार्यक्रम में होती अन्य महिलायें उनको ईष्या की नजर से देखती क्योंकि वह अपने सामने … Read more

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